- धर्म-संस्कृति और आदिवासी परंपराओं की रक्षा का संकल्प
- बीमारी ठीक करने के नाम पर चंगाई सभाओं और प्रार्थना महोत्सवों पर रोक लगाने का दावा
मुकेश रंजन
Ranchi: आदिवासी समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण को लेकर कांके प्रखंड की बोड़ेया पंचायत में ग्रामसभा ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को पंचायत के बोड़ेया गांव में ग्रामसभा के निर्णय के आलोक में बोड़ेया चौक पर पूजा-अर्चना के बाद एक सूचना बोर्ड लगाया गया। इसमें धर्म प्रचारकों, ईसाई पादरियों और पास्टरों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध की घोषणा की गई है। साथ ही, बीमारी ठीक करने के नाम पर चंगाई प्रार्थना सभाओं और प्रार्थना महोत्सवों के आयोजन पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।

पंचायत की मुखिया सोमा उरांव की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान अनिल उरांव ने की। इस दौरान विश्वकर्मा पहान ने विधिवत पूजा-पाठ कर बोर्ड लगाने की प्रक्रिया पूरी की। आयोजकों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आदिवासी समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं, रूढ़ियों और प्रथाओं का संरक्षण करना है।
संविधान और पेसा कानून का दिया हवाला
ग्रामसभा के निर्णय के समर्थन में आयोजकों ने संविधान की पांचवीं अनुसूची और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून की धारा 4(क) एवं 4(घ) का हवाला दिया। उनका कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और प्रथागत व्यवस्थाओं के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर गांव में सूचना बोर्ड लगाकर अपने निर्णय की जानकारी सार्वजनिक की गई है।
आयोजकों ने चेतावनी दी कि ग्रामसभा के निर्णय का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध ग्रामसभा अपने स्तर पर कार्रवाई करेगी। हालांकि, इस तरह के प्रतिबंधों की कानूनी वैधता और कार्रवाई की सीमा संबंधित कानूनों एवं न्यायिक निर्णयों के अनुरूप ही निर्धारित होगी।
धर्मांतरण से सामाजिक व्यवस्था प्रभावित होने का दावा
झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा, रांची के अध्यक्ष मेघा उरांव ने कहा कि धर्मांतरण के कारण आदिवासी समाज की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे पारंपरिक रीति-रिवाजों और प्रथागत स्वशासन व्यवस्था के सामने भी चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं।
ग्रामसभा के अधिकारों पर दिया जोर
जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्रामसभा को स्थानीय विकास के साथ-साथ जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामसभा द्वारा इस उद्देश्य से सूचना बोर्ड लगाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
कई सामाजिक और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में झरी उरांव, राजन उरांव, अरविंद साहू, फूलचंद तिर्की, आदित्य महतो, संतु कुमार महतो, जिला परिषद सदस्य किरण देवी, वार्ड सदस्य कैलाश मंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश सदस्य सनी उरांव, प्रदीप टोप्पो, परना उरांव, बालेश्वर पहान, प्रदीप पहान, मालती देवी, सुनीता देवी, बासो देवी, बीरन देवी, प्रोफेसर गंवा तिग्गा, राजू उरांव और रामधन उरांव सहित अन्य लोग उपस्थित थे।



