- पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धांजलि देते हुए उनके जीवन, नेतृत्व और सामाजिक योगदान को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया।
Dehradun : पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर गुरुवार को उत्तराखंडभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंडित पंत को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन और उनके आदर्श सभी के लिए प्रेरणादायी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत हमारे लिए पाथेय हैं और उनके बताए मार्ग पर चलकर उत्तराखंड के विकास को सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाना भाजपा का लक्ष्य है। उन्होंने पंडित पंत को प्रखर राजनीतिज्ञ और सच्चा देशभक्त बताया।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है पंत का व्यक्तित्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का महान व्यक्तित्व और कृतित्व युवा पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा। उन्होंने कहा कि पंडित पंत ने देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कुली बेगारी प्रथा और जमींदारी उन्मूलन के लिए पंडित पंत के संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त इन बुराइयों को समाप्त करने में पंडित पंत ने अहम भूमिका निभाई।
आधुनिक भारत के निर्माण में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और देश के गृहमंत्री के रूप में भी आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का शानदार नेतृत्व और उनके आदर्श देशवासियों को सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे।
पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में आयोजित हुए कार्यक्रम
पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर पिथौरागढ़ जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान जिलाधिकारी आशीष भटगांई, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रमों में वक्ताओं ने पंडित पंत के जीवन संघर्ष, राष्ट्र और समाज के लिए उनके योगदान तथा उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला। देहरादून, पौड़ी, नैनीताल समेत अन्य जिलों में भी उनकी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद किया गया।


