Patna: बिहार की बौद्ध और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित विशेष यात्रा के तहत थाईलैंड का 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार पहुंचा है। रविवार को प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया स्थित विश्वप्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में दर्शन और प्रार्थना की। मंदिर परिसर की आध्यात्मिक शांति और भगवान बुद्ध से जुड़े इस पवित्र स्थल ने थाई अतिथियों को प्रभावित किया। यह यात्रा बिहार पर्यटन विभाग के ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल—ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को बिहार के बौद्ध, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों से परिचित कराना है।
बोधगया में महाबोधि मंदिर के किए दर्शन
थाई प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया पहुंचकर महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की। यह वही स्थान है जहां बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने की मान्यता है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार महाबोधि मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बोधगया के आध्यात्मिक वातावरण को विशेष अनुभव बताया। दल ने यहां डूंगेश्वरी पहाड़ी, सुजाता मंदिर और सुजाता स्तूप का भी भ्रमण किया। इसके अलावा थाई मंदिर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संग्रहालय और 80 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा को भी प्रतिनिधिमंडल ने देखा।

बिहार की बौद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा
पर्यटन विभाग के विशेष सचिव सह पर्यटन निदेशक उदयन मिश्रा के अनुसार, बिहार में बौद्ध परिपथ से जुड़े स्थलों के विकास और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। थाईलैंड से आए प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को बिहार की बौद्ध विरासत के अंतरराष्ट्रीय प्रचार और भारत-थाईलैंड के सांस्कृतिक एवं पर्यटन संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। बिहार पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट भी महाबोधि मंदिर को बोधगया का प्रमुख वैश्विक बौद्ध तीर्थस्थल बताती है।
राजगीर और नालंदा भी जाएगा प्रतिनिधिमंडल
बोधगया के बाद प्रतिनिधिमंडल बिहार के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेगा। यात्रा कार्यक्रम में राजगीर, नालंदा, वैशाली और पटना को शामिल किया गया है।
21 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल प्रमुख स्थल:
- गेहलौर स्थित दशरथ मांझी स्मारक
- राजगीर नेचर सफारी
- राजगीर ग्लास ब्रिज
- प्राचीन नालंदा महाविहार
- राजगीर विश्व शांति स्तूप
- वेणुवन
इसके बाद दल वैशाली में रिलिक स्तूप, विश्व शांति स्तूप और कोल्हुआ स्थित अशोक स्तंभ का भी भ्रमण करेगा।
पटना में पर्यटन हितधारकों के साथ होगी बैठक
यात्रा के अंतिम चरण में पटना में स्थानीय पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें बिहार में पर्यटन की संभावनाओं, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के अनुभव और राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। थाई प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा बिहार के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में सामने आई है। बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली जैसे स्थलों को एक यात्रा कार्यक्रम में शामिल किए जाने से राज्य की बौद्ध और ऐतिहासिक विरासत को एक साथ प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।


