- आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला, डॉ. शंभु प्रसाद सिंह ने विशेषज्ञों के साथ साझा किए विचार
मुकेश रंजन
Ranchi : बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और लगातार गहराते पर्यावरणीय असंतुलन के बीच धरती के भविष्य को लेकर आईआईटी (आईएसएम), धनबाद में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर देश के विशेषज्ञों ने गंभीर मंथन किया। आरोग्य भारती, झारखंड के कार्याध्यक्ष डॉ. शंभु प्रसाद सिंह ने अपने मित्रों के साथ कार्यशाला में सहभागिता की और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ संवाद कर महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
पर्यावरण संकट केवल प्रकृति का नहीं, मानव अस्तित्व का सवाल
डॉ. शंभु प्रसाद सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रकृति के साथ लगातार बढ़ते हस्तक्षेप का असर अब मौसम के बदलते मिजाज, जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे में समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
कार्यशाला में वायु, जल और मृदा प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, वन एवं हरित क्षेत्र का संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण तथा सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य तैयार किया जा सकता है।
प्राकृतिक आपदाएं दे रहीं गंभीर संकेत
डॉ. सिंह ने कहा कि आज पूरा विश्व पर्यावरणीय असंतुलन की चुनौती से जूझ रहा है। बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं मानव समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर पुनर्विचार करने का संदेश दे रही हैं। नेपाल में सामने आई भयावह प्राकृतिक त्रासदी ने भी पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन को लेकर गंभीर चिंतन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना होगा। शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। घर, मोहल्ले और गांव स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी व्यापक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
रांची महानगर के कोषाध्यक्ष हीरानाथ साहू ने भी पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यशाला में डॉ. बीके रॉय, डॉ. नरेश प्रसाद, महेश सिंह और हीरानाथ साहू समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने विशेषज्ञों के विचारों को सुना और पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों पर ज्ञानवर्धन किया। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि धरती सुरक्षित रहेगी, तभी मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकेगा।


