Bihar: बिहार के भवन निर्माण विभाग में कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार सामने आ रही है। 22 सितंबर 2026 को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक कमलेश कुमार के खिलाफ चार ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। EOU के अनुसार, उनके पास ज्ञात आय के वैध स्रोतों से करीब 3.12 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति होने का प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिला है। कमलेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई से पहले भी भवन निर्माण विभाग से जुड़े एक अधीक्षण अभियंता की संपत्ति को लेकर निगरानी ब्यूरो की छापेमारी चर्चा में रही है। वहीं, विभाग के एक अन्य अधीक्षण अभियंता की पत्नी के नाम पर खरीदी गई संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
कमलेश कुमार पर EOU की बड़ी कार्रवाई
बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक कमलेश कुमार के खिलाफ EOU ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में कार्रवाई की है। EOU के मुताबिक, जांच में 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये की ऐसी संपत्ति का प्रथम दृष्टया पता चला है, जो उनकी ज्ञात आय के वैध स्रोतों से अधिक है। यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 103.30 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इसी आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने 21 सितंबर 2026 को कांड संख्या 24/26 दर्ज किया। विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी आदेश मिलने के बाद 22 सितंबर की सुबह पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने संबंधित ठिकानों पर तलाशी शुरू की। तलाशी के दौरान संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आगे की कार्रवाई तलाशी में मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
16 सितंबर को अधीक्षण अभियंता सत्येंद्र चौधरी के ठिकानों पर छापेमारी
कमलेश कुमार पर कार्रवाई से कुछ दिन पहले ही भवन निर्माण विभाग के एक अन्य वरिष्ठ इंजीनियर के खिलाफ निगरानी ब्यूरो ने कार्रवाई की थी। 16 सितंबर को पूर्णिया अंचल में तैनात अधीक्षण अभियंता सत्येंद्र कुमार चौधरी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। निगरानी ब्यूरो की जांच में चार करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई थी।
जांच के दौरान सामने आई संपत्तियों में शामिल हैं:
- फुलवारीशरीफ में पांच मंजिला मकान
- दानापुर और नौबतपुर में करीब 26 कट्ठा जमीन
- ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट
- पटना के शास्त्रीनगर स्थित एजी कॉलोनी में तीन मंजिला मकान
निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई में इन संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज मिलने की बात कही गई थी।
अब एक और अधीक्षण अभियंता की संपत्ति को लेकर सवाल
कमलेश कुमार और सत्येंद्र चौधरी से जुड़ी जांच के बीच भवन निर्माण विभाग के एक अन्य अधीक्षण अभियंता की संपत्ति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। संबंधित अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह अधिकारी पहले राजधानी पटना और बाद में सीमांचल क्षेत्र में पदस्थापित रहे हैं। आरोप है कि सीमांचल में पदस्थापना के दौरान उन्होंने एक से अधिक डिवीजन का प्रभार भी संभाला था। वर्तमान में वह गांधीजी से जुड़े ऐतिहासिक जिले में पदस्थापित बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस अधिकारी पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार और अवैध कमाई से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
पत्नी के नाम पर नौबतपुर में जमीन खरीदने का दावा
आरोपों के मुताबिक, संबंधित अधीक्षण अभियंता ने जून 2023 में अपनी पत्नी के नाम पर नौबतपुर अंचल में बिहटा-सरमेरा मुख्य सड़क के किनारे करीब 25 डिसमिल यानी लगभग आठ कट्ठा जमीन खरीदी। बताया जा रहा है कि जमीन चार अलग-अलग प्लॉट में खरीदी गई। दस्तावेजों में इसकी सरकारी कीमत करीब 1.10 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि बाजार मूल्य इससे अधिक होने का दावा किया जा रहा है। यहां महत्वपूर्ण सवाल जमीन की खरीद के साथ-साथ उसके घोषित स्रोत और संबंधित अधिकारी की आय के बीच संभावित अंतर को लेकर है। यदि किसी जांच एजेंसी को इस संपत्ति और अधिकारी की आय में असंगति मिलती है, तो मामला आय से अधिक संपत्ति की जांच के दायरे में आ सकता है।
संपत्ति के ब्योरे को लेकर भी उठ रहे सवाल
उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 2022-23 में संबंधित अभियंता ने अपनी पत्नी के नाम पर कुछ संपत्तियों का उल्लेख किया था और पत्नी का PAN नंबर भी संपत्ति संबंधी जानकारी में दिया था। दावा है कि वर्ष 2023-24 के बाद पत्नी की संपत्ति का विस्तृत विवरण पहले की तरह नहीं दिया गया। इसके स्थान पर यह जानकारी दी गई कि पत्नी स्वयं आयकर रिटर्न दाखिल करती हैं। संपत्ति विवरण में पति-पत्नी के नाम पर लिए गए ऋण का उल्लेख किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, केवल संपत्ति विवरण में किसी संपत्ति का उल्लेख नहीं होने से अपने आप अवैध संपत्ति साबित नहीं होती। इसके लिए आय के स्रोत, खरीद की रकम, स्वामित्व और संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई से बढ़ी निगरानी
भवन निर्माण विभाग से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ हाल की कार्रवाई ने सरकारी इंजीनियरों की संपत्ति और आय के स्रोत को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। कमलेश कुमार पर EOU की कार्रवाई और सत्येंद्र चौधरी के खिलाफ निगरानी ब्यूरो की छापेमारी के बाद विभाग के दूसरे अधिकारियों की संपत्ति भी चर्चा में आ रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन अन्य अधिकारियों को लेकर संपत्ति संबंधी आरोप सामने आ रहे हैं, उनके मामलों में संबंधित जांच एजेंसियां कोई प्रारंभिक जांच या सत्यापन करती हैं या नहीं। फिलहाल आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने तक इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



