बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण पर बड़ा अपडेट, 122 जातियों का होगा सर्वे; जानें कैसे तय होगा आरक्षण

बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण की तस्वीर जल्द साफ हो सकती है। 122 जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सर्वे कर आयोग सरकार को रिपोर्ट देगा।
बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण पर बड़ा अपडेट
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Bihar: बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) आरक्षण को लेकर प्रक्रिया तेज होने के संकेत हैं। पंचायत चुनाव में ईबीसी को आरक्षण देने के लिए राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जातियों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करेगा। इस अध्ययन के आधार पर आयोग सरकार को अपनी अनुशंसा सौंपेगा, जिसके बाद पंचायतवार आरक्षण का स्वरूप तय किया जा सकेगा। राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग को पंचायती राज विभाग की ओर से तय दिशा-निर्देशों के अनुसार सर्वे और अध्ययन करना है। इसमें ईबीसी वर्ग की आबादी के साथ-साथ पंचायत स्तर पर उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा।

122 जातियों की स्थिति का होगा आकलन

अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल करीब 122 जातियों की मौजूदा स्थिति का अध्ययन प्रस्तावित है। इसके लिए ईबीसी बहुल गांवों और शहरी क्षेत्रों में सर्वे कराया जा सकता है।

सर्वे के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी:

  • अलग-अलग पंचायतों में ईबीसी आबादी का अनुपात
  • वर्ग की सामाजिक और आर्थिक स्थिति
  • शैक्षणिक स्थिति
  • स्थानीय निकायों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व
  • विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व
  • किन वर्गों को राजनीतिक आरक्षण की आवश्यकता है

इस अध्ययन से यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग क्षेत्रों में ईबीसी आरक्षण किस आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए।

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पंचायती राज विभाग आयोग को देगा सहयोग

ईबीसी आरक्षण को लेकर पंचायती राज विभाग और राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारियों के बीच बैठक भी हो चुकी है। आयोग ने अध्ययन के लिए विभागीय सहयोग की मांग की थी। इसके बाद विभाग की ओर से आयोग को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है। जिलाधिकारियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजे जाने की बात कही गई है, ताकि सर्वे और अध्ययन की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर आवश्यक सहायता मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट से तय होगी प्रक्रिया

पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्गों के राजनीतिक आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। इसी प्रक्रिया के आधार पर आरक्षण से संबंधित निर्णय लिया जाना है।

इसमें व्यापक तौर पर तीन प्रमुख पहलू शामिल हैं:

1. कुल आरक्षण की सीमा

अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को मिलाकर कुल आरक्षण निर्धारित सीमा से अधिक न हो, इसका ध्यान रखना होगा।

2. राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अध्ययन

यह भी आकलन किया जाना है कि ईबीसी की किन जातियों या समूहों को स्थानीय निकायों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षण की जरूरत है।

3. समर्पित आयोग की रिपोर्ट

आरक्षण के लिए एक समर्पित आयोग द्वारा अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करना आवश्यक है। बिहार में राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग को इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी गई है।

SC-ST की आबादी भी होगी अहम

पंचायतों में आरक्षण तय करने के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी भी महत्वपूर्ण आधार होगी। उपलब्ध जनगणना संबंधी आंकड़ों के आधार पर एससी-एसटी के लिए आरक्षण निर्धारित किए जाने के बाद शेष हिस्से में ईबीसी आरक्षण की व्यवस्था पर निर्णय लिया जाएगा। पिछले पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। हालांकि आगामी चुनाव में ईबीसी आरक्षण का वास्तविक प्रतिशत कितना होगा, यह आयोग के अध्ययन और सरकार को दी जाने वाली अनुशंसा के बाद ही स्पष्ट होगा।

इन जातियों की स्थिति भी होगी अध्ययन का हिस्सा

ईबीसी वर्ग में शामिल विभिन्न जातियों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति के साथ उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी अध्ययन किया जाएगा। इनमें कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू और नाई जैसी जातियां शामिल हैं। आयोग की रिपोर्ट में क्षेत्रवार स्थिति सामने आने के बाद सरकार के लिए पंचायत स्तर पर आरक्षण का आधार तय करना आसान होगा।

पंचायतों के परिसीमन से भी बदल सकती है तस्वीर

आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों का नया परिसीमन भी प्रस्तावित है। वर्तमान में बिहार में करीब 8,049 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या में बदलाव होने की संभावना है। नई पंचायतों के गठन या सीमाओं में बदलाव का सीधा असर आरक्षण की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पंचायतवार आबादी और नई सीमाओं के आधार पर आरक्षित सीटों और पंचायतों का निर्धारण नए सिरे से करना पड़ सकता है।

कब साफ होगी EBC आरक्षण की तस्वीर?

फिलहाल ईबीसी आरक्षण का अंतिम प्रतिशत तय नहीं हुआ है। पहले आयोग की ओर से सर्वे और विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। साथ ही पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही आगामी बिहार पंचायत चुनाव में ईबीसी आरक्षण का अंतिम स्वरूप सामने आएगा। इसलिए अभी आरक्षण का कोई निश्चित प्रतिशत बताना जल्दबाजी होगी। आयोग की अनुशंसा और सरकार के अंतिम निर्णय के बाद ही पंचायतवार आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होगी।

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