Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में लंबे समय से लंबित प्रारंभिक जांच यानी PE (Preliminary Enquiry) के मामलों से जुड़े स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले से संबंधित संक्षिप्त नोट कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इस पर अदालत ने सरकार को जल्द से जल्द संक्षिप्त नोट दाखिल करने का निर्देश दिया। इससे पहले मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी की ओर से संबंधित नोट अदालत के समक्ष पेश किया जा चुका है।
ACB की लंबित PE जांच पर हाईकोर्ट की नजर
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ACB में लंबित सभी प्रारंभिक जांचों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट तैयार कर अदालत के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि ACB में कई प्रारंभिक जांच लंबे समय से लंबित हैं। कुछ मामलों के 11 साल से अधिक समय से लंबित होने की बात भी सामने रखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, ACB ने अदालत को कुल 173 लंबित मामलों की जानकारी दी थी। अदालत ने इन मामलों की वर्तमान स्थिति और जांच में हो रही देरी के कारणों से संबंधित जानकारी भी मांगी थी।
2013 और 2022 से लंबित हैं कुछ जांच
अदालत को बताया गया कि कुछ प्रारंभिक जांच वर्ष 2013 और 2022 से लंबित हैं। लंबे समय तक जांच पूरी नहीं होने के कारण संबंधित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई में यह भी बताया गया कि कुछ मामलों में जांच लंबित रहने के दौरान संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त तक हो चुके हैं। ऐसे मामलों में वर्षों तक जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं होने को लेकर अदालत के समक्ष सवाल उठाए गए।
कोर्ट ने कहा- अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकती PE
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रारंभिक जांच को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि किसी व्यक्ति को केवल प्रारंभिक जांच के नाम पर अनिश्चितकाल तक लंबित स्थिति में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट के समक्ष यह बात भी रखी गई थी कि प्रारंभिक जांच सामान्य तौर पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए। यदि आरोपों में प्रथम दृष्टया आधार मिलता है तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच को समाप्त किया जाना चाहिए।
सरकार को जल्द दाखिल करना होगा संक्षिप्त नोट
मौजूदा सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से संक्षिप्त नोट पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने इसे जल्द दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, एमिकस क्यूरी की ओर से अपना संक्षिप्त नोट पहले ही अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। मामले की सुनवाई के दौरान ACB की लंबित प्रारंभिक जांचों की संख्या, उनकी स्थिति और देरी के कारणों पर भी चर्चा हुई।
अब हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार
मामले में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के अंतिम आदेश से यह स्पष्ट होगा कि ACB में वर्षों से लंबित प्रारंभिक जांचों के निपटारे को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। फिलहाल अदालत के फैसले पर सभी की नजर है। आदेश आने के बाद लंबे समय से लंबित PE मामलों के निस्तारण और उनकी जांच प्रक्रिया को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




