Manmohan Singh Jayanti: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 26 सितंबर को डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए उन्हें याद किया और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान का उल्लेख किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के गांव गाह में हुआ था। उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय के बाद कैंब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से की। आगे चलकर वह देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों में शामिल हुए और कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर जिम्मेदारी संभाली।
Tributes to our former Prime Minister Dr. Manmohan Singh Ji on his birth anniversary. He spent many years in public life and served the nation with dedication.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 26, 2026
पीएम मोदी ने डॉ. मनमोहन सिंह को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और देश के प्रति योगदान को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने कई वर्षों तक सार्वजनिक जीवन में रहकर समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी डॉ. सिंह को याद करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन और भारत की प्रगति में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश के लिए उनके योगदान को याद किया।
1991 के आर्थिक सुधारों में निभाई अहम भूमिका
डॉ. मनमोहन सिंह की पहचान एक अर्थशास्त्री और नीति विशेषज्ञ के तौर पर भी रही। वर्ष 1991 में जब पीवी नरसिम्हा राव सरकार बनी, तब मनमोहन सिंह को केंद्रीय वित्त मंत्री बनाया गया। उन्होंने 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान भारत में व्यापक आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, 1991-96 के दौरान वित्त मंत्री के रूप में डॉ. सिंह की भूमिका भारत की आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण बदलावों से जुड़ी रही।
2004 में बने देश के प्रधानमंत्री
डॉ. मनमोहन सिंह ने 22 मई 2004 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वर्ष 2009 में उन्होंने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला और 26 मई 2014 तक इस पद पर रहे। वह देश के 14वें प्रधानमंत्री थे। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण कानून और योजनाएं लागू हुईं। इनमें ग्रामीण रोजगार, सूचना का अधिकार और शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रमुख प्रावधान शामिल रहे।
मनमोहन सिंह का राजनीतिक सफर
- जन्म: 26 सितंबर 1932
- जन्मस्थान: गाह, अविभाजित पंजाब
- वित्त मंत्री: 1991 से 1996
- प्रधानमंत्री: 22 मई 2004 से 26 मई 2014
- राज्यसभा सदस्य: 1991 से
- निधन: 26 दिसंबर 2024
- निधन के समय उम्र: 92 वर्ष
प्रधानमंत्री बनने से पहले संभाली कई अहम जिम्मेदारियां
डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री बनने से काफी पहले ही प्रशासन और आर्थिक नीति के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई थी। वह भारत सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार और वित्त मंत्रालय में सचिव जैसे पदों पर रहे। इसके अलावा उन्होंने योजना आयोग में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे। उनका अकादमिक सफर भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय से की और इसके बाद कैंब्रिज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र में डी.फिल की डिग्री प्राप्त की।
26 दिसंबर 2024 को हुआ था निधन
डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित एम्स में निधन हुआ था। वह 92 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें प्रख्यात राजनेता, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और विशिष्ट नेता के रूप में याद किया था। उनके निधन के बाद केंद्र सरकार ने सात दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की थी और उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था।
आर्थिक नीति और सार्वजनिक जीवन में छोड़ी छाप
डॉ. मनमोहन सिंह का सार्वजनिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। अर्थशास्त्र, प्रशासन और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल और वित्त मंत्री के रूप में 1991 के आर्थिक सुधारों में उनकी भूमिका भारतीय आर्थिक इतिहास के प्रमुख अध्यायों में शामिल है। उनकी जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं द्वारा श्रद्धांजलि दिया जाना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका को याद करने का अवसर है।




