Ranchi/Hazaribagh: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले के मौजा केंटोनमेंट स्थित 50 डिसमिल बेशकीमती खास महाल जमीन पर बनी चहारदीवारी और अन्य संरचनाओं को तोड़ने की प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने 5 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान अगले आदेश तक तोड़फोड़ पर रोक लगाने का निर्देश दिया। इस जमीन की लीज अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है और सरकार के स्तर पर इसे वापस लेने का प्रस्ताव विचाराधीन है। वहीं, जमीन पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के परिवार के अवैध कब्जे का आरोप है।
50 डिसमिल खास महाल जमीन का क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, हजारीबाग के मौजा केंटोनमेंट में स्थित 50 डिसमिल खास महाल जमीन मोहम्मद एहसान को लीज पर दी गई थी। इस लीज की अवधि 31 मार्च 2008 को समाप्त हो गई। लीजधारी की मृत्यु के बाद जमीन के स्वामित्व और उसके उत्तराधिकारियों से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हुई। मोहम्मद एहसान की बेटी नाजिश कौशर ने इस जमीन को 15 लाख रुपये में बेचने के लिए दीपूगढ़ा निवासी मनीष कुमार के साथ एग्रीमेंट किया था। बताया जाता है कि इस समझौते के समय पांच लाख रुपये अग्रिम भी दिए गए थे। हालांकि, बाद में नाजिश ने एग्रीमेंट रद्द कर दिया और दलजीत सिंह को पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी। इसके बाद दलजीत सिंह ने नाजिश कौशर के नाम पर जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए आवेदन दिया। तत्कालीन खास महाल पदाधिकारी ने इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर रिपोर्ट मांगी। साथ ही, लीजधारी की स्थिति और उनके वंशजों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई।
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के परिवार पर कब्जे का आरोप
जमीन को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया चलने के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के परिवार पर इस पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगा। तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी विद्याभूषण कुमार ने जमीन पर बनवाई जा रही चहारदीवारी को तोड़ दिया था। इसके बाद उपायुक्त के आदेश पर योगेंद्र साव और तत्कालीन विधायक अंबा प्रसाद के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने का फैसला लिया गया। हालांकि, पुलिस ने जमीन पर कब्जे के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन ने कब्जा रोकने और चहारदीवारी हटाने की कोशिश की। इस दौरान अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि पूर्व मंत्री ने जमीन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात कहते हुए कब्जा हटाने पहुंचे अधिकारियों का विरोध किया।
सरकार के स्तर पर जमीन वापस लेने का प्रस्ताव
खास महाल जमीन की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद जिला प्रशासन ने लीज का नवीनीकरण करने के बजाय जमीन सरकार को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की। इस प्रस्ताव पर प्रमंडलीय आयुक्त ने भी सहमति जताई। इसके बाद मामला अंतिम निर्णय के लिए भू-राजस्व विभाग को भेजा गया। खबर के मुताबिक, विभागीय सचिव की सहमति मिलने के बावजूद जमीन वापस लेने का प्रस्ताव मंत्री स्तर पर विचाराधीन है। इस बीच जमीन पर बनी चहारदीवारी और अन्य निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा कानूनी विवाद में बदल गया।
हाईकोर्ट में याचिका के बाद तोड़फोड़ पर रोक
इस मामले में नाजिश कौशर के पति मुजीबुर्रहमान ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि सरकार की ओर से जमीन वापस लेने की जानकारी दी गई है और जिला प्रशासन वहां बनी चहारदीवारी सहित अन्य संरचनाओं को तोड़ने की कार्रवाई कर रहा है। याचिकाकर्ता ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने 5 अक्टूबर 2026 को अगले आदेश तक तोड़फोड़ पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल जमीन पर बनी संरचनाओं को तोड़ने की कार्रवाई रुकी रहेगी। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सरकार के स्तर पर होने वाले निर्णय पर नजर रहेगी।




