Jamshedpur: नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी में एक छात्र का रजिस्ट्रेशन रोके जाने और उसके परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने इस संबंध में झारखंड के राज्यपाल और विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों को शिकायत भेजी है। संगठन ने छात्र का रजिस्ट्रेशन तत्काल कराने, मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यूनिफॉर्म नहीं खरीदने पर रजिस्ट्रेशन रोकने का आरोप
AISF के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश राजक ने 1 अगस्त 2026 को लिखे शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि छात्र राजवीर सिंह का रजिस्ट्रेशन कॉलेज की यूनिफॉर्म नहीं खरीद पाने के कारण रोक दिया गया। संगठन का दावा है कि रजिस्ट्रेशन रोकने के साथ छात्र को निष्कासन की धमकी भी दी गई। AISF ने आशंका जताई है कि इस कार्रवाई से छात्र की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और उसके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
परिजनों के साथ धक्का-मुक्की का भी आरोप
शिकायत पत्र के अनुसार, छात्र के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्या का समाधान कराने के लिए जब उसके परिजन विश्वविद्यालय पहुंचे, तो वहां मौजूद बाउंसरों ने उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और अभद्र व्यवहार किया। AISF ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए किया जाना चाहिए। संगठन के मुताबिक, पढ़ाई से जुड़े किसी विवाद में छात्र और उसके परिवार के साथ दुर्व्यवहार का आरोप गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
राज्यपाल से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
AISF ने अपनी शिकायत में राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन की प्रमुख मांगें हैं:
- छात्र राजवीर सिंह का रजिस्ट्रेशन तत्काल कराया जाए।
- परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच हो।
- दोषी पाए जाने वाले बाउंसरों और संबंधित प्रबंधन के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
- छात्र की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी
फिलहाल, इस मामले में लगाए गए आरोप AISF की ओर से भेजे गए शिकायत पत्र पर आधारित हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि छात्र का रजिस्ट्रेशन किन परिस्थितियों में रोका गया और परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।




