विरुद्धाहार से बढ़ता पाचन विकार का खतरा, आयुर्वेद ने दी चेतावनी

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now New Delhi : आयुर्वेद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गलत खाद्य संयोजन, यानी विरुद्धाहार, पेट संबंधी गंभीर विकारों का कारण बन सकता है। लंबे समय तक ऐसे खान-पान का पालन करने से शरीर में

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New Delhi : आयुर्वेद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गलत खाद्य संयोजन, यानी विरुद्धाहार, पेट संबंधी गंभीर विकारों का कारण बन सकता है। लंबे समय तक ऐसे खान-पान का पालन करने से शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन बढ़ता है, जिससे कई बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार दूध का सेवन खट्टे फलों के साथ बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि खट्टे पदार्थों में मौजूद एसिड दूध के कैल्शियम और प्रोटीन के साथ प्रतिक्रिया कर पेट दर्द और गैस जैसी समस्याएँ उत्पन्न करता है। दूध को मछली, पुदीना, नमकयुक्त खाद्य पदार्थ, तली-भुनी चीजें, लहसुन, प्याज और कटहल के साथ भी नहीं लेना चाहिए।
रात के भोजन के साथ दूध लेना भी गलत आदत मानी गई है। इसे हमेशा सोने से लगभग एक घंटे पहले लेना उचित है।

दही के संदर्भ में विशेषज्ञ बताते हैं कि इसे तले हुए भोजन, मछली, चावल, बीन्स और खट्टे अचार के साथ नहीं खाना चाहिए। इससे पाचन शक्ति धीमी पड़ती है, गैस बनती है और शरीर में भारीपन महसूस होता है। दही को गर्म करना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है।

ठंडे और गर्म खाद्य पदार्थों का मिश्रण भी खतरनाक विरुद्धाहार की श्रेणी में आता है। परांठा या भारी भोजन के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और शरीर में विषैले पदार्थ बढ़ते हैं। जंक फूड व कोल्ड ड्रिंक का संयोजन सुस्ती और नींद बढ़ाता है।
लंच के तुरंत बाद ठंडा-मीठा खाने से भी पाचन कमजोर पड़ता है और कब्ज की समस्या पैदा हो सकती है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि दही और दूध का सेवन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। दूध के साथ केला, नींबू, अचार या सिरका जैसे पदार्थों का सेवन भी विरुद्धाहार माना जाता है, जो पाचन अग्नि को कमजोर कर देता है।

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