बरगाई जमीन घोटाला: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज, ट्रायल का रास्ता साफ

Ranchi : रांची के बरगाई क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren को विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज

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Ranchi : रांची के बरगाई क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren को विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश योगेश कुमार ने सोमवार को यह आदेश सुनाया। इससे पहले 3 जून को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बचाव पक्ष की ओर से दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दायर डिस्चार्ज याचिका में कहा गया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से शामिल किया गया है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि ईडी के पास ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे उनका कथित अपराध से सीधा संबंध साबित हो सके। बचाव पक्ष ने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी रूप से कमजोर बताते हुए आरोपमुक्त करने की मांग की थी।

हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे विचारण (ट्रायल) चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसी कारण डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया गया।

गौरतलब है कि इस मामले की जांच के दौरान ईडी ने कई स्थानों पर छापेमारी की थी और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की थी। जांच के बाद एजेंसी ने कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। ईडी का आरोप है कि जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर कर अवैध लेन-देन किए गए और उनसे प्राप्त धन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर 2025 को विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दायर कर खुद को मामले से मुक्त किए जाने की मांग की थी। लेकिन अदालत के ताजा आदेश के बाद अब मुकदमे की नियमित सुनवाई जारी रहेगी।

कानूनी जानकारों के अनुसार, डिस्चार्ज याचिका खारिज होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि अदालत को प्रथम दृष्टया मामले की सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मिले हैं। अब अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को भी अपनी दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

राज्य के मुख्यमंत्री से जुड़े होने के कारण यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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