जंगल-पहाड़ों की खाक छान रहे बीएयू के वैज्ञानिक, स्वदेशी नस्लों की तलाश तेज

सोनाहातू और राहे के गांवों में सर्वेक्षण, झारखंड को ‘जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट जोन’ बनाने का लक्ष्य Ranchi: झारखंड के जंगलों और गांवों में पलने वाले विशिष्ट पशुधन की पहचान अब गुमनामी में नहीं रहेगी। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के वैज्ञानिक स्थानीय पशुओं, कुक्कुट और कुत्तों की

जंगल-पहाड़ों की खाक छान रहे बीएयू के वैज्ञानिक, स्वदेशी नस्लों की तलाश तेज
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  • सोनाहातू और राहे के गांवों में सर्वेक्षण, झारखंड को ‘जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट जोन’ बनाने का लक्ष्य

Ranchi: झारखंड के जंगलों और गांवों में पलने वाले विशिष्ट पशुधन की पहचान अब गुमनामी में नहीं रहेगी। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के वैज्ञानिक स्थानीय पशुओं, कुक्कुट और कुत्तों की विशिष्ट नस्लों की तलाश में दुर्गम इलाकों तक पहुंच रहे हैं। सोनाहातू और राहे प्रखंड के गांवों में सर्वेक्षण कर उनकी आनुवंशिक विशेषताओं का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।

शनिवार को सेरेंगहातु, गोवाली और बरवाडीह गांवों में टीम ने नदी, पहाड़ी रास्तों और हाथियों की मौजूदगी वाले जंगलों के बीच सर्वेक्षण किया। अभियान का उद्देश्य स्थानीय नस्लों की पहचान कर उन्हें पंजीकृत कराना और आनुवंशिक विरासत को संरक्षित करना है।

आईसीएआर की परियोजना के तहत चल रही इस पहल से झारखंड को ‘जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट जोन’ बनाने का लक्ष्य है, ताकि राज्य का कोई भी विशिष्ट पशुधन पहचान से वंचित न रहे।

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