- प्रेम मंजरी उच्च विद्यालय में लोकगायक मधु मंसूरी का सम्मान, ‘नागपुर कर कोरा’ गीत से झूमे विद्यार्थी; नई पीढ़ी को अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान
मुकेश रंजन
Ranchi: लोकगीतों में झारखंड की माटी की महक और जनजीवन की धड़कन को स्वर देने वाले प्रख्यात नागपुरी लोकगायक एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत मधु मंसूरी को प्रेम मंजरी उच्च विद्यालय में सम्मानित किया गया। पिठोरिया एजुकेशनल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह में लोकसंस्कृति के संरक्षण और नागपुरी भाषा के संवर्धन का संदेश गूंजा। विद्यार्थियों के बीच पहुंचे मधु मंसूरी ने अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने का आह्वान किया।
भाषा में रची-बसी है झारखंड की सांस्कृतिक पहचान
समारोह में पद्मश्री मधु मंसूरी ने कहा कि नागपुरी भाषा झारखंड की सभ्यता, संस्कृति और पहचान की संवाहक है। यह महज संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यहां के जनजीवन, लोकपरंपराओं, सामाजिक मूल्यों और ऐतिहासिक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति है। नागपुरी के शब्दों और लोकगीतों में झारखंड की माटी की सुगंध, लोगों की भावनाएं और उनकी जीवनशैली सहज रूप से प्रतिबिंबित होती हैं।
उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। अपनी भाषा से दूर होता समाज धीरे-धीरे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी कटने लगता है। क्षेत्रीय भाषाएं न केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखती हैं, बल्कि पीढ़ियों के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत बनाती हैं। इसलिए नागपुरी भाषा का संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना जरूरी
मधु मंसूरी ने विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा, लोकगीतों और सांस्कृतिक परंपराओं पर गर्व करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि झारखंड की विशिष्ट पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को अपनी भाषाई विरासत से परिचित कराना आवश्यक है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं को इस दिशा में सार्थक पहल करनी चाहिए, ताकि लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंच सके।
उन्होंने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को भूलकर नहीं। अपनी जड़ों से जुड़कर ही समाज अपनी विशिष्ट पहचान को मजबूत बना सकता है।
‘नागपुर कर कोरा’ से जीवंत हुई लोकसंस्कृति’
समारोह का विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला, जब मधु मंसूरी ने अपना प्रसिद्ध नागपुरी गीत ‘नागपुर कर कोरा’ प्रस्तुत किया। गीत की प्रस्तुति ने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को झारखंड की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा से रूबरू कराया। लोकधुनों के माध्यम से उन्होंने अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति प्रेम का संदेश दिया।
पिठोरिया एजुकेशनल फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह सम्मान समारोह केवल एक कलाकार के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय भाषा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित करने वाला अवसर बना। विद्यालय परिवार ने पद्मश्री मधु मंसूरी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
कार्यक्रम में पिठोरिया एजुकेशनल फाउंडेशन के निदेशक सुजीत कुमार केसरी, दीपक चौरसिया, विजय पांडेय, नीरज कुमार , रंजीत तिर्की, सचित राणा और अनूप रंजन सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने मधु मंसूरी को सम्मानित कर नागपुरी भाषा और झारखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के प्रति आदर व्यक्त किया।



