- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण में बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण किया, पीड़ितों से संवाद कर भोजन, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली।
Patna : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित वैशाली और सारण जिलों का दौरा किया। उन्होंने हाजीपुर और सोनपुर में संचालित बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण किया और वहां रह रहे बाढ़ पीड़ितों से सीधे संवाद कर राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में संचालित सामुदायिक रसोई का भी जायजा लिया। उन्होंने भोजन की व्यवस्था देखी और स्वयं बाढ़ पीड़ितों को भोजन परोसा।
वैशाली में राहत शिविरों की व्यवस्था देखी
वैशाली जिले में गंगा ब्रिज थाना के सामने संचालित बाढ़ राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने कम्युनिटी किचन का निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन वितरण काउंटर और निबंधन-सह-नियंत्रण कक्ष की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
भोजन की गुणवत्ता की जांच करने के बाद मुख्यमंत्री ने शिविर में रह रहे लोगों से भोजन, रहने और अन्य सुविधाओं को लेकर उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। लोगों ने बताया कि शिविर में पर्याप्त भोजन मिल रहा है और व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं।
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने शैक्षणिक शिविर में पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और खान-पान की जानकारी ली।
उन्होंने महिलाओं और पुरुषों के लिए की गई अलग-अलग आवासीय व्यवस्था का भी जायजा लिया। इस दौरान दोनों शिविरों में रह रहे लोगों से मुख्यमंत्री ने सीधे संवाद किया।
स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा सुविधाओं की ली जानकारी
स्वास्थ्य शिविर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से जांच और उपचार की उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पशु चिकित्सा शिविर की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को पशुओं के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशु चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ के पानी में डूबने से हुई मौत के मामलों में मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की।
सोनपुर राहत शिविर में लोगों के साथ किया भोजन
इसके बाद मुख्यमंत्री सारण जिले के सोनपुर पहुंचे। यहां शहर स्थित स्काउट एंड गाइड सेंटर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का उन्होंने निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने कम्युनिटी किचन की व्यवस्था देखी और शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर भोजन, आवास और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के साथ भोजन भी किया और उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया।
शिविर में रह रहे लोगों ने राहत और व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने बताया कि शिविर में भोजन, पेयजल और रहने समेत आवश्यक सुविधाओं की अच्छी व्यवस्था की गई है।
फसल क्षति का आकलन कर किसानों को मिलेगा मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से हुई फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा और प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी सरकार प्रयास कर रही है।
गंगा के जलस्तर में 17-18 सेंटीमीटर गिरावट
हाजीपुर और सोनपुर में राहत शिविरों के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के जलस्तर में करीब 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि फरक्का बराज से अभी करीब 15 लाख क्यूसेक पानी का लगातार डिस्चार्ज हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने अगले दो-तीन दिनों में स्थिति में और सुधार की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल आपदा की स्थिति है और ऐसी परिस्थिति में सरकार पूरी तरह जनता के साथ खड़ी है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, चिकित्सा, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को स्थिति की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद प्रत्येक प्रभावित हाउसहोल्ड का सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर नुकसान का आकलन कर प्रभावित लोगों को हरसंभव राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा के जल प्रवाह को एक निर्धारित सीमा में रखने और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर केंद्रीय जल आयोग से भी बातचीत की गई है। सरकार का प्रयास है कि हर वर्ष गंगा में आने वाली बाढ़ से प्रभावित होने वाले लोगों को स्थायी रूप से राहत दिलाई जा सके।

