Patna: बिहार की महिलाएं अब सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निर्माण और प्लंबिंग जैसे कामों में भी अपनी पहचान बना रही हैं। कभी पुरुषों का क्षेत्र माने जाने वाले राजमिस्त्री के काम में जीविका दीदियां अब ‘रानी मिस्त्री’ के नाम से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। राज्य में 250 से अधिक जीविका दीदियां टॉयलेट क्लिनिक के माध्यम से निर्माण और प्लंबिंग से जुड़े काम कर रही हैं। प्रशिक्षण लेने के बाद ये महिलाएं शौचालयों की मरम्मत से लेकर तकनीकी खामियों को ठीक करने और छोटे-बड़े निर्माण कार्यों तक में सेवाएं दे रही हैं।
मुजफ्फरपुर से शुरू हुआ था टॉयलेट क्लिनिक अभियान
ग्रामीण विकास विभाग ने यूनिसेफ के सहयोग से वर्ष 2024 में मुजफ्फरपुर से टॉयलेट क्लिनिक अभियान की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे यह पहल राज्य के दूसरे जिलों तक पहुंच गई। प्रशिक्षण के बाद जीविका दीदियां शौचालय निर्माण और प्लंबिंग से जुड़े कई तकनीकी काम कर रही हैं। इनमें पानी निकासी की पाइपलाइन, पाइप का सही ढलान, फ्लश वाल्व, कनेक्शन, पी-ट्रैप और वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाओं की मरम्मत शामिल है। इसके अलावा सेफ्टी टैंक में सुधार, रेट्रोफिटिंग और शौचालयों की मरम्मत का काम भी ये महिलाएं कर रही हैं।

हर महीने 8 से 10 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई
इस काम से जीविका दीदियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। विभाग के अनुसार, प्रत्येक महिला को इससे करीब 8 से 10 हजार रुपये तक की अतिरिक्त मासिक आय हो रही है। अपनी कमाई से महिलाएं परिवार के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जरूरतों में योगदान दे रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार में उनकी भूमिका भी बढ़ रही है।

दूसरे राज्यों में भी दे रही हैं प्रशिक्षण
बिहार की प्रशिक्षित जीविका दीदियों की मांग अब दूसरे राज्यों में भी हो रही है। ये महिलाएं पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में जाकर अन्य महिलाओं को निर्माण और प्लंबिंग का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इस तरह बिहार की रानी मिस्त्री सिर्फ खुद रोजगार से नहीं जुड़ रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं।

टॉयलेट क्लिनिक अब बनेगा स्वच्छता क्लिनिक
टॉयलेट क्लिनिक की सफलता के बाद ग्रामीण विकास विभाग ने इसे स्वच्छता क्लिनिक के रूप में विस्तार देने का फैसला किया है। इसके तहत जीविका दीदियां शौचालयों के अलावा कई अन्य स्वच्छता से जुड़ी परिसंपत्तियों के रखरखाव और मरम्मत का काम भी करेंगी। इनमें पैडल रिक्शा, ई-रिक्शा, अपशिष्ट प्रबंधन इकाई, प्लास्टिक अपशिष्ट इकाई और गोवर्धन बायोगैस प्लांट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, रानी मिस्त्री के रूप में काम करने वाली ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुले हैं। स्थानीय स्तर पर काम मिलने से उन्हें नियमित आय का जरिया मिला है। ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका से जुड़ी महिलाएं आज निर्माण और प्लंबिंग जैसे तकनीकी कामों में आगे बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर रोजगार से जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। बिहार की ये रानी मिस्त्री अब यह दिखा रही हैं कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना सकती हैं, जिन्हें लंबे समय से पुरुषों तक सीमित माना जाता रहा है।



