रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच में सीआईडी ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने मामले में 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 97 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसके साथ 82 भौतिक, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य भी पेश किए गए हैं। जांच में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवास से बरामद लैपटॉप, मोबाइल फोन, अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेन-देन और व्हाट्सएप चैट जैसे साक्ष्य सामने आए हैं। अब इन सबूतों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से मामले की कई अहम कड़ियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पूर्व JPSC अध्यक्ष के आवास से टूटा लैपटॉप और फॉर्मेट किया मोबाइल बरामद
सीआईडी की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज भी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छापेमारी के दौरान उनके आवास से डेल कंपनी का एक टूटा हुआ लैपटॉप और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया, जिसे फॉर्मेट किया गया था। जांच एजेंसी ने इन उपकरणों को मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों के रूप में शामिल किया है। हालांकि, केवल उपकरणों की स्थिति के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि साक्ष्य मिटाने की कोशिश हुई थी। इसके लिए फोरेंसिक जांच और अन्य तथ्यों का सामने आना जरूरी है। सीआईडी को कथित तौर पर 15 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू की तारीख, पदों की प्राथमिकता और गोपनीय इंटरव्यू कोड से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। इन दस्तावेजों की अहमियत इस बात से जुड़ी है कि चयन प्रक्रिया में गोपनीय सूचनाओं का इस्तेमाल किस तरह हुआ और क्या नियमों का उल्लंघन किया गया।
बैंक खातों और नकद लेन-देन की भी जांच
JPSC घोटाले की जांच केवल परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। सीआईडी ने वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारियां भी जुटाई हैं। चार्जशीट से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मिजोरम और मणिपुर के बैंक खातों के जरिए हुए लेन-देन की पड़ताल की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आयोग के एक तत्कालीन सदस्य की ओर से निजी सहायक के माध्यम से ढाई लाख रुपये नकद तत्कालीन अध्यक्ष के आवास तक पहुंचाए गए थे। इस लेन-देन की परिस्थितियों और कथित उद्देश्य की पुष्टि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी है। इसके अलावा, जब्त लैपटॉप बैग से मिले 15 अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों से संबंधित कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को भी जांच में शामिल किया गया है। इन रिकॉर्ड से संबंधित लोगों के बीच संपर्क की कड़ियों को समझने में मदद मिल सकती है।
TDPL एजेंसी को लेकर भी उठे सवाल
जांच में आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के कार्यालय से आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल को दिए गए वर्क ऑर्डर से संबंधित दस्तावेज और गोपनीय फाइलें मिलने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने एजेंसी को पहले ही दागी बताते हुए लिखित चेतावनी दी थी। इसके बावजूद एजेंसी को काम सौंपे जाने के फैसले की जांच की जा रही है। सीआईडी ने एजेंसी के प्रतिनिधियों और आयोग के अधिकारियों के बीच संपर्क, यात्रा तथा ठहरने की व्यवस्था से जुड़े तथ्यों को भी जांच के दायरे में रखा है। इन जानकारियों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा संचालन में एजेंसी की भूमिका क्या थी और गोपनीय सूचनाओं तक उसकी पहुंच किस स्तर तक थी।
अभय तिवारी के ठिकानों से नकदी और अन्य दस्तावेज मिलने का दावा
इस मामले में अभय कुमार तिवारी की भूमिका भी जांच के केंद्र में बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके ठिकानों से करीब साढ़े पांच लाख रुपये नकद, कई बैंक खातों का विवरण और एक सह-अभियुक्त के लिए खरीदी गई बुलेट बाइक की रसीद बरामद हुई थी। सीआईडी इन दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए आरोपियों के बीच संभावित संपर्क और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। हालांकि, किसी व्यक्ति के ठिकाने से नकदी या दस्तावेज मिलने भर से अपराध में उसकी भूमिका अपने आप साबित नहीं होती। इसका निर्धारण साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
चड़रीटोला के कथित गुप्त कार्यालय से मिला डेटा
जांच में रांची के चड़रीटोला इलाके में टीडीपीएल से जुड़े एक कार्यालय का भी उल्लेख है। जानकारी के अनुसार, इस कार्यालय का रेंट एग्रीमेंट अभय तिवारी के नाम पर था। सीआईडी ने वहां से हार्ड डिस्क और क्लाउड सर्वर से संबंधित डेटा की जांच की। दावा है कि बरामद डिजिटल सामग्री में 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा डेटा भी मिला। यदि इन रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच में परीक्षा की गोपनीय जानकारी के अनुचित इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
WhatsApp चैट और OMR शीट से खुल सकते हैं अहम राज
इस मामले में व्हाट्सएप चैट, ओएमआर शीट की छायाप्रतियां और डायरियों को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की ओर से व्हाट्सएप के माध्यम से परिणाम अन्य लोगों को भेजे जाने का आरोप है। इन चैट और दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि संदेश कब भेजे गए, उनमें कौन-सी जानकारी थी और संबंधित लोगों की भूमिका क्या रही। डिजिटल साक्ष्यों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परीक्षा परिणामों या गोपनीय दस्तावेजों तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई थी या नहीं। हालांकि, फोरेंसिक रिपोर्ट और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही इन आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, अब न्यायिक प्रक्रिया पर नजर
सीआईडी की ओर से 97 पन्नों की चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। एजेंसी ने इसमें 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ आरोपों और जुटाए गए साक्ष्यों का विवरण पेश किया है। अब मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और आरोपों के परीक्षण पर नजर रहेगी। चार्जशीट दाखिल होना आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना नहीं है। दोष या निर्दोष होने का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
JPSC Scam के इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी किस तरह बाहर पहुंची और कथित गड़बड़ियों में किन लोगों की क्या भूमिका थी। डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और फोरेंसिक रिपोर्ट इन सवालों के जवाब तलाशने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।




