Ranchi : झारखंड की सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक आंदोलन के पुरोधा डॉ. विश्वेश्वर प्रसाद केसरी को उचित सम्मान देने की मांग अब जोर पकड़ चुकी है। राजधानी रांची के चुटिया स्थित नन्हे बचपन प्ले स्कूल में केशरवानी वैश्य सभा, रांची जिला के तत्वावधान में आयोजित प्रेस वार्ता में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया कि रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर (फ्लाईओवर) का नाम ‘डॉ. बी. पी. केसरी फ्लाईओवर’ रखा जाए।
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कार्यक्रम में पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी, संरक्षक तपेश्वर केसरी, प्रो. प्रेमसागर केसरी, अनिल केसरी सहित समाज के कई वरिष्ठजनों, बुद्धिजीवियों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। सभा ने एक स्वर में कहा कि यह मांग केवल एक नामकरण नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा और पहचान को सम्मान देने की पुकार है।
डॉ. केसरी: विचारों के शिल्पी, संस्कृति के प्रहरी
वक्ताओं ने डॉ. केसरी के जीवन और योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि उन्होंने नागपुरी संस्थान, पिठोरिया की स्थापना कर झारखंडी भाषा और संस्कृति को पुनर्जीवित किया। वे राजीव गांधी द्वारा गठित झारखंड विषय समिति के सदस्य रहे और डॉ. रामदयाल मुंडा के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने जेल की यातनाएं सहीं, मगर अपने विचारों की लौ को नहीं बुझने दिया। 400 साल पुराने नागपुरी काव्य को पुनः प्रकाशित कर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का बीड़ा उठाया।
फ्लाईओवर को एक नाम, जो दिशा देगा
सभा का मानना है कि रातू रोड फ्लाईओवर का नाम ‘डॉ. बी. पी. केसरी फ्लाईओवर’ रखना न केवल झारखंडी आत्मगौरव को बल देगा, बल्कि यह नाम आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, विचार और विरासत से जोड़ने वाला प्रतीक बनेगा।
राज्य सरकार से विनम्र अपील
सभा ने झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि वे डॉ. बी. पी. केसरी के योगदान को राज्य स्तर पर मान्यता दें और जनभावना को सम्मान देते हुए फ्लाईओवर का नामकरण करें। यह केवल एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि झारखंड की बौद्धिक अस्मिता की मांग है।

