Ranchi/ Bedo : घाघरा पंचायत के कोकडे गांव में शनिवार को एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम “पहान मिलन समारोह” का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल पारंपरिक आदिवासी मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास था, बल्कि समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बना।
इस समारोह में ‘रुड़ी प्रथा’ को केंद्र में रखकर चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस प्राचीन परंपरा से जुड़ी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं को साझा किया और इसे अगली पीढ़ी तक संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रमुख वक्ता – जगरनाथ भगत, बिशु उरांव, फागु मुंडा और अनुप मुंडा – ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आदिवासी परंपराएं केवल रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि यह एक समृद्ध जीवन-दर्शन और सामूहिक पहचान का हिस्सा हैं।
सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि सांस्कृतिक चेतना आज भी समाज की आत्मा में जीवित है। पारंपरिक गीतों, संवादों और साझा अनुभवों के माध्यम से समारोह में एक नई सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार हुआ।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि आधुनिकता की तेज़ रफ्तार के बीच भी हमारी परंपराएं और पहचान न केवल बची रहनी चाहिए, बल्कि गर्व के साथ आगे बढ़नी चाहिए।
समारोह का संदेश
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक सभा नहीं था, बल्कि यह अपनी जड़ों से जुड़ने की पुकार और परंपराओं को पुनर्जीवित करने की पहल था। पहान मिलन समारोह ने यह साबित किया कि सांस्कृतिक चेतना अभी भी गाँव-गाँव में एक नई सुबह की तरह जाग रही है।






