Washington : वाशिंगटन। अमेरिका में रह रहे लाखों अवैध प्रवासियों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब ऐसे लोगों को बिना किसी जमानत या सुनवाई के सीधे हिरासत में लिया जाएगा और उन्हें लंबे समय तक डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा।
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यह नई नीति अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) द्वारा लागू की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब ऐसे प्रवासी जो अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे हैं, उन्हें हिरासत में रखा जाएगा और उन्हें कोर्ट में जमानत की अर्जी देने का भी अधिकार नहीं होगा। इस नीति की पुष्टि ICE के कार्यवाहक निदेशक टॉड एम. लियोन्स ने की है।
क्या है नई व्यवस्था?
टॉड लियोन्स ने बताया कि अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने आव्रजन प्रक्रिया की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है। इसके अनुसार, अमेरिका में अवैध रूप से दाखिल होने वाले व्यक्तियों को निर्वासन प्रक्रिया पूरी होने तक हिरासत में ही रखा जाएगा। यह समय महीनों से लेकर सालों तक का हो सकता है।
कई दशकों से रह रहे प्रवासियों पर भी असर
वकीलों का कहना है कि इस नीति का असर उन प्रवासियों पर भी पड़ेगा जो दशकों से अमेरिका में रह रहे हैं और जिनके बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं। इससे उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने का भी अवसर नहीं मिलेगा, जिससे उनका अमेरिका में रहना और भी मुश्किल हो जाएगा।
बड़ी धनराशि का प्रावधान
सरकार ने प्रवासियों को हिरासत में रखने के लिए अगले चार वर्षों में 45 अरब डॉलर का बजट तय किया है। इससे ICE के डिटेंशन सेंटर्स में 80,000 से 100,000 बिस्तरों की व्यवस्था की जाएगी।
वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता
डलास के प्रमुख वकील पॉल हंकर ने कहा, “इस नीति के तहत प्रवासियों को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखा जा सकता है। उन्हें कानूनी लड़ाई लड़ने का मौका ही नहीं मिलेगा।”
हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिका को सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है और इससे गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम लगेगी। ट्रंप प्रशासन इस नीति को कठोर लेकिन आवश्यक कदम बता रहा है।

