नई दिल्ली/रांची। झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से विख्यात दिवंगत शिबू सोरेन को लोक सेवा एवं जनहित कार्यों में उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान प्रदान किया।
शिबू सोरेन की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया। व्हीलचेयर पर मंच तक पहुंचीं रूपी सोरेन को राष्ट्रपति ने पद्म भूषण प्रदान किया। यह भावुक क्षण न केवल सोरेन परिवार बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव और सम्मान का अवसर बन गया।
समारोह में सोरेन परिवार के कई सदस्य उपस्थित रहे। झारखंड की प्रमुख राजनीतिक हस्ती एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस ऐतिहासिक पल को साक्षी भाव से देखा।
शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंड राज्य के गठन और सामाजिक न्याय की दिशा में उनके योगदान को देशभर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और लोकहित में किए गए कार्यों को मान्यता देते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान के लिए चयनित किया।
इस सम्मान की घोषणा और सम्मान ग्रहण समारोह के बाद झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल है। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।



