ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को न करें अनदेखा: पारस हॉस्पिटल में जागरूकता कैंप

Ranchi: वर्ल्ड ट्यूमर डे के अवसर पर आज पारस हॉस्पिटल, एचईसी कैंपस, रांची में एक निःशुल्क हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। यह कैंप सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला, जिसमें विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन डॉ. अरूण कुमार और उनकी टीम ने मरीज़ों को

ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को न करें अनदेखा: पारस हॉस्पिटल में जागरूकता कैंप
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Ranchi: वर्ल्ड ट्यूमर डे के अवसर पर आज पारस हॉस्पिटल, एचईसी कैंपस, रांची में एक निःशुल्क हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। यह कैंप सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला, जिसमें विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन डॉ. अरूण कुमार और उनकी टीम ने मरीज़ों को मुफ्त परामर्श दिया और विभिन्न जांचों पर 50% तक की छूट दी गई।

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इस अवसर पर डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर लेकिन समय पर पहचाना जाए तो नियंत्रित की जा सकने वाली स्थिति है। उन्होंने कहा कि ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं — गैर-कैंसरयुक्त (बेनाइन) और कैंसरयुक्त (मेलिग्नेंट)। उन्होंने कहा कि हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता, लेकिन किसी भी तरह का ट्यूमर अगर समय रहते नहीं पहचाना जाए तो जानलेवा हो सकता है।

डॉ. अरूण ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सुबह-सुबह लगातार सिरदर्द, उल्टी, चक्कर आना, दृष्टि में धुंधलापन, या व्यक्तित्व में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। ये सभी ब्रेन ट्यूमर के संभावित लक्षण हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि ब्रेन ट्यूमर की पहचान MRI, CT स्कैन और रेडियोलॉजी जांचों के माध्यम से होती है। इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी शामिल हो सकते हैं, जो ट्यूमर के प्रकार, आकार और स्थान पर निर्भर करता है।

डॉ. अरूण ने यह भी स्पष्ट किया कि मोबाइल फोन के प्रयोग से ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, और यदि किसी के परिवार में यह बीमारी रही हो, तो 5-10% तक पीढ़ी में होने की संभावना रहती है।

पारस हॉस्पिटल एचईसी के मार्केटिंग हेड मानस लाभ ने जानकारी दी कि यहां ब्रेन ट्यूमर के उपचार की समुचित सुविधा उपलब्ध है और विशेषज्ञों की टीम द्वारा अब तक सैकड़ों मरीज़ों का सफल इलाज किया जा चुका है।

यह स्वास्थ्य शिविर न केवल बीमारी की पहचान और जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि लोगों को नियमित जांच की आवश्यकता को समझने में भी मददगार साबित हुआ।

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