रांची: झारखंड में नियुक्ति से जुड़े विज्ञापनों को रद्द करने के फैसले पर राज्य सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार को नियुक्तियों से संबंधित नीति तय करने, नियुक्ति प्रक्रिया संचालित करने और विशेष परिस्थितियों में विज्ञापन रद्द करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। सरकार ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित विज्ञापन को रद्द करने का निर्णय उसकी कानूनी और प्रशासनिक शक्तियों के तहत लिया गया है।
सीडीपीओ नियुक्ति के विज्ञापन को किया गया था रद्द
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के उप सचिव सुधीर कुमार की ओर से अदालत में शपथ पत्र दाखिल किया गया है। इसमें विज्ञापन संख्या 21/2023 का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अधिसूचना संख्या लोसेओ-6/लोसेअ-0107/26 का 5404 के माध्यम से इस विज्ञापन को रद्द किया जा चुका है। विज्ञापन संख्या 21/2023 के तहत बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की गई थी। विज्ञापन रद्द किये जाने के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दाखिल की गई है। मामले में न्यायालय की ओर से पहले स्थगनादेश भी जारी किया जा चुका है।
सरकार ने कहा- विज्ञापन रद्द करने का अधिकार
नियुक्ति विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका पर सरकार ने अपने शपथ पत्र में याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित नीतिगत निर्णय लेने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार विज्ञापन को रद्द करने का अधिकार भी राज्य सरकार के पास है।सरकार के मुताबिक, संबंधित फैसला किसी सामान्य परिस्थिति में नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने अपनी वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया है।
सरकार का मुख्य पक्ष
शपथ पत्र में सरकार की ओर से मुख्य रूप से कहा गया है कि—
- राज्य सरकार नियुक्ति संबंधी नीति निर्धारित करने में सक्षम है।
- सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार है।
- विशेष परिस्थितियों में नियुक्ति विज्ञापन को रद्द किया जा सकता है।
- संबंधित विज्ञापन को रद्द करने का निर्णय वैधानिक शक्तियों के तहत लिया गया है।
- विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका में की गई दलीलें स्वीकार योग्य नहीं हैं।
अन्य कारणों पर सुनवाई के दौरान रखेगी पक्ष
सरकार ने शपथ पत्र में यह भी संकेत दिया है कि नियुक्ति से जुड़े विज्ञापनों को रद्द करने के पीछे मौजूद अन्य कारणों को वह अदालत में होने वाली बहस के दौरान विस्तार से रखेगी। यानी फिलहाल सरकार ने अपने जवाब में मुख्य रूप से विज्ञापन रद्द करने के अपने अधिकार और कानूनी स्थिति पर जोर दिया है। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। खासकर यह देखना होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद विज्ञापन रद्द करने के सरकार के फैसले को न्यायालय किस कानूनी दृष्टिकोण से देखता है। इससे राज्य में नियुक्तियों से जुड़े ऐसे अन्य मामलों पर भी असर पड़ सकता है।



