मुख्य संवाददाता
Ranchi : जनजाति सुरक्षा मंच की मीडिया प्रभारी और झारखंड प्रदेश मुखिया संघ की अध्यक्ष डॉ. सोमा उराँव ने मंगलवार को सरना धर्म कोड, आदिवासी अधिकारों और महिला सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा –
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“हमें अधिकार चाहिए, सजावटी कोड नहीं!”
श्री उराँव ने माननीय सांसद सुखदेव भगत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को सीधे तौर पर तीन गंभीर सवालों पर जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की।
सरना कोड नहीं, संवैधानिक सुरक्षा चाहिए –
सोमा उराँव ने सरना धर्म कोड को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर यह कोड संविधान के अनुच्छेद 26 के अंतर्गत बौद्ध और जैन धर्म की तर्ज पर मान्यता नहीं देता, तो यह आदिवासियों के हकों के साथ धोखा होगा।
उन्होंने कहा अगर सरना धर्म कोड केवल अनुच्छेद 29 और 30 तक सीमित रहा, तो यह हमारे अधिकारों की बलि होगी। कहा कैबिनेट से आधिकारिक गारंटी पत्र की मांग की है, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कोड मिलने के बाद सभी संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
बलात्कारियों पर चुप्पी क्यों?” – आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
गोड्डा, बोकारो और गिरिडीह में आदिवासी बहनों के साथ हुए अत्याचारों पर सोमा उराँव ने कांग्रेस नेताओ से पूछा:
क्या आदिवासी बहनों की इज्जत पर आपकी संवेदनाएं मर चुकी हैं? आप चुप क्यों हैं? किस दबाव में हैं?”
जाति प्रमाण पत्र में अब ‘पति’ का नाम भी हो अनिवार्य –
तीसरे अहम मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गैर-आदिवासी पुरुष, आदिवासी महिलाओं से शादी कर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं और आरक्षण, जमीन, सरकारी योजनाओं और राजनीति में लाभ उठा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट माँग की:
जाति प्रमाण पत्र में पिता के साथ-साथ पति का नाम अनिवार्य किया जाए। वरना हम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
आदिवासी चेतना की हुंकार –
सोमा उराँव ने कहा की यह आवाज केवल विरोध नहीं, एक चेतावनी है ।अब आदिवासी समाज समझौता नहीं करेगा, आधा-अधूरा कोड नहीं चलेगा।

