Ranchi : झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा-रांची द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सामाजिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के युवक-युवतियों का ‘सामूहिक आदर्श विवाह’ सेक्टर-3, धुर्वा में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया। कुल 19 जोड़ों ने विधिवत आदिवासी परंपरा और रीति के अनुरूप विवाह किया।
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वर-वधु की प्रमुख जोड़ियाँ:
प्रेम उरांव-सुमन कुमारी, अनिल उरांव-सरोज एक्का, अजय कच्छप-रोशनी कुमारी, सोनू गाड़ी-अनीता कच्छप, विकास सिंह बिंझिया-हीरामुनी कच्छप, रंजीत तिर्की-देवंती कुमारी, सुमित उरांव-सुशीला लकड़ा, अरुण मुंडा-आशा तिर्की, करमदयाल उरांव-सुमति उरांव, रामू सांगा-रूपमणी सांगा, रितेश मुंडा-स्नेहा कच्छप, सुखराम समद-एतवारी कुमारी, संजय उरांव-ललिता कुमारी, गोवर्धन उरांव-संदीपा उरांव, कार्तिक उरांव-कुरमी उरांव, सुशील एक्का-ललिता कुजूर, धनसिंह मुंडा-सपना कुमारी, रोशन तिर्की-सुषमिता मुंडा, रोशन तिर्की-सीमा तिर्की।
समिति अध्यक्ष मेघा उरांव ने बताया कि आधुनिकता के दौर में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है। यह विवाह उन जोड़ों को सामाजिक मान्यता देने का प्रयास है जो आर्थिक कारणों या सामाजिक दबाव में विवाह नहीं कर पा रहे थे।
मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री एवं जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा, यह कार्य न केवल सामाजिक सरोकार का प्रतीक है, बल्कि हमारी परंपराओं की रक्षा का सशक्त माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि, आज आदिवासी समाज डीजे और बाहरी प्रभावों में पड़कर अपनी मूल परंपराओं से दूर होता जा रहा है। इस प्रकार के आयोजन हमारी अस्मिता को संजोए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि, हम अपने पूर्वजों की परंपरा और रीति के अनुसार ही विवाह संपन्न कराते हैं, यही हमारी पहचान है और इसे बचाए रखना हमारा दायित्व है।
मुखिया संघ अध्यक्ष व जनजातीय सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने बताया कि विवाह पूर्णतः पहान पूजा, हड़िया तापन, मुर्गा बलि जैसी पारंपरिक विधियों के साथ संपन्न हुआ।
विशिष्ट अतिथि:
जनजाति आयोग सदस्य डॉ. आशा लकड़ा, पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर, आरती कुजूर, अंजलि लकड़ा, रितेश उरांव (पूर्व मुखिया), रोशनी खलखो, जॉर्ज लकड़ा, कर्मपाल उरांव, वृंदा उरांव, भगवान सहाय, प्रफुल्ल अकात, देवनंदन सिंह, सुशील मरांडी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग:
लोरया उरांव, लुथरु उरांव, बिरसा भगत, रामा उरांव, लक्ष्मण उरांव, मुन्नी देवी, अनीता मुंडा, राजू उरांव, बबलू उरांव, लालमुनी देवी, रोपनी मिंज, डॉ. बुटन महली, सुशीला उरांव, रवि उरांव आदि का विशेष योगदान रहा।



