Ranchi: राजधानी रांची के नगड़ी गांव में रिम्स-2 अस्पताल के निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। शनिवार को इस विरोध को और बल तब मिला जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी खुद गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ खड़े नजर आए।

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बाबूलाल मरांडी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उपजाऊ खेतों पर अस्पताल बनाना न केवल गंभीर प्रशासनिक भूल है, बल्कि यह आदिवासियों को उनकी जमीन से उजाड़ने की साजिश भी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार ने बेरिकेडिंग नहीं हटाई और किसानों को खेतों में लौटने नहीं दिया, तो यह आंदोलन जल्द ही एक उग्र जनआंदोलन में बदल जाएगा।”
क्या है रिम्स-2 परियोजना?
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित रिम्स-2 की योजना में 110 एकड़ उपजाऊ भूमि पर 1074 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक अस्पताल बनना है। इसमें 700 बेड, 100 MBBS सीटें, और 50 PG मेडिकल सीटें निर्धारित की गई हैं। सरकार का तर्क है कि मौजूदा रिम्स अब पुरानी संरचना बन चुका है, और झारखंड को एक आधुनिक चिकित्सा संस्थान की आवश्यकता है।
ग्रामीणों की आपत्ति और पीड़ा
नगड़ी के ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर उनका जीवन और आजीविका टिकी है, उसी को सरकार बिना पूछे ले रही है। वे कहते हैं, “इलाज चाहिए लेकिन उजाड़ कर नहीं, हमारी जमीन हमारे जीवन का आधार है।”
ग्रामीणों के नारों और बयानों में छलकती है तकलीफ:
- “हमारा पेट इस जमीन से चलता है।”
- “बिना राय लिए जमीन पर कब्जा क्यों?”
- “विकास चाहिए, विस्थापन नहीं।”
नगड़ी बन रहा संघर्ष की जमीन
आज नगड़ी की गलियों में केवल विरोध नहीं, बल्कि हक की हुंकार सुनाई दे रही है। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की बात कर रही है, तो दूसरी ओर गांववाले अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह संघर्ष अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, सम्मान और जीविका का प्रतीक बन चुका है।






