Jharkhand Jail: 4 सेंट्रल जेलों में शुरू होगा ओपन बैरक सिस्टम

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now झारखंड की चार सेंट्रल जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक सिस्टम शुरू होगा, जिसके तहत पात्र कैदी दिन में बाहर काम कर शाम को जेल लौट सकेंगे। Ranchi : झारखंड सरकार चुने हुए कैदियों को

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  • झारखंड की चार सेंट्रल जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक सिस्टम शुरू होगा, जिसके तहत पात्र कैदी दिन में बाहर काम कर शाम को जेल लौट सकेंगे।

Ranchi : झारखंड सरकार चुने हुए कैदियों को दिन में जेल से बाहर जाकर काम करने और रोजी-रोटी कमाने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए राज्य की चार सेंट्रल जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक सिस्टम शुरू किया जाएगा, जहां पात्र कैदी काम करने के बाद शाम को जेल लौटेंगे।

यह व्यवस्था रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, हजारीबाग की जय प्रकाश नारायण सेंट्रल जेल, पूर्वी सिंहभूम की घाघीडीह सेंट्रल जेल और दुमका सेंट्रल जेल में शुरू की जाएगी। इन चारों जेलों में उन बैरक और सेल की पहचान भी कर ली गई है, जिन्हें ओपन या सेमी-ओपन व्यवस्था के लिए बदला जाएगा।

सुबह बाहर जाकर शाम को लौटेंगे कैदी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IG (जेल) सुदर्शन मंडल ने शनिवार को बताया कि ओपन या सेमी-ओपन बैरक सिस्टम के तहत कैदियों को सुबह 6 या 7 बजे जेल से बाहर जाकर काम करने की अनुमति होगी।

उन्होंने कहा कि कैदी करीब 12 घंटे बाद जेल लौटेंगे। चूंकि ये जेलें शहरी इलाकों में स्थित हैं, इसलिए कैदियों के पास रोजी-रोटी कमाने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को मिलेगा मौका

यह पहल राज्य में जेल सुधारों को मजबूत करने और कैदियों को समाज में दोबारा घुलने-मिलने में मदद करने के प्रयासों का हिस्सा है। राज्य कैबिनेट ने हाल ही में एक सरकारी प्रस्ताव के जरिए इस व्यवस्था को मंजूरी दी है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि झारखंड जेल और सुधार सेवा अधिनियम, 2025 में ओपन सुधार संस्थान बनाने का प्रावधान है।

मंडल के अनुसार, इस योजना के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि कौन से कैदी इस कार्यक्रम के लिए पात्र होंगे।

उन्होंने कहा कि अच्छा व्यवहार और जेल के नियमों का पालन पात्रता के मुख्य आधार होंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पहल

यह कदम सुप्रीम कोर्ट के सुहास चकमा बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देश के बाद उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने उन राज्यों से, जहां ओपन सुधार संस्थान (OCI) काम नहीं कर रहे हैं, ऐसे संस्थान बनाने की संभावना का आकलन करने को कहा था।

जहां अलग ओपन सुधार संस्थान बनाना संभव नहीं है, वहां राज्यों को मौजूदा जेलों के भीतर ही ओपन या सेमी-ओपन बैरक बनाने की सलाह दी गई है।

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