New Delhi : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। शेख हसीना की तुलना में उन्हें भारत विरोधी रुख रखने वाली नेता माना जाता रहा, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि खालिदा जिया का भारत से गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है।
खालिदा जिया का जन्म वर्ष 1945 में भारत के वर्तमान जलपाईगुड़ी में हुआ था। उस समय यह क्षेत्र अविभाजित बंगाल के दिनाजपुर जिले का हिस्सा था। आजादी से पहले न तो भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था और न ही बंगाल विभाजित हुआ था। 1947 के विभाजन के बाद पश्चिम बंगाल भारत में शामिल हुआ, जबकि पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना और बाद में 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बना।
इस ऐतिहासिक बदलाव के चलते खालिदा जिया ने अपने जीवन में तीन देशों—भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश—की नागरिकता का अनुभव किया। बांग्लादेश बनने के बाद वह देश की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हुईं और पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। विभाजन के बाद उनका परिवार दिनाजपुर चला गया, जहां उन्होंने मिशनरी स्कूल और फिर गर्ल्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की।
पति की हत्या के बाद राजनीति में सक्रिय भूमिका
खालिदा जिया की शादी बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान से हुई थी। वर्ष 1981 में एक सैन्य तख्तापलट के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद बांग्लादेश में करीब नौ वर्षों तक सैन्य शासन रहा।
पति की मृत्यु के बाद खालिदा जिया पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतरीं। उन्होंने तत्कालीन सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ सात दलों का गठबंधन बनाकर लोकतंत्र की बहाली की लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्हें 1983 से 1990 के बीच सात बार हिरासत में भी लिया गया, लेकिन वह अपने राजनीतिक रुख से पीछे नहीं हटीं। उन्होंने 1986 के चुनावों का बहिष्कार भी किया था।
प्रधानमंत्री कार्यकाल और विवाद
वर्ष 1991 में खालिदा जिया पहली बार प्रधानमंत्री बनीं और बांग्लादेश में संसदीय लोकतंत्र की बहाली की। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाहक सरकार प्रणाली की शुरुआत भी की। 1991 के बाद वह तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं।
हालांकि 2001 से 2006 के बीच का उनका कार्यकाल विवादों में रहा। उनके बेटे तारिक रहमान भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे। लंबे समय बाद तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी पर उनका भव्य स्वागत हुआ और बदले राजनीतिक हालातों में उन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक मतभेदों और विवादों के बावजूद, खालिदा जिया को बांग्लादेश की राजनीति में एक मजबूत और निर्णायक महिला नेतृत्व के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने निजी दुखों के बावजूद देश की सत्ता तक का सफर तय किया।






