Ranchi : इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा, जबकि रंगों का पर्व होली 4 मार्च को पूरे देश में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और भद्रा काल को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
वरिष्ठ पुरोहित मनोज पांडेय ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा का प्रवेश 2 मार्च को शाम 5:18 बजे होगा, जो 3 मार्च को शाम 4:33 बजे तक रहेगा। इस दौरान भद्रा काल 2 मार्च शाम 5:18 बजे से 3 मार्च सुबह 4:56 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन में भद्रा के मुख का त्याग और पूंछ का ग्रहण किया जाता है। इसी कारण 2 मार्च की रात 12:50 बजे, भद्रा पूंछ में होलिका दहन किया जाएगा।
4 मार्च को सर्वत्र होली
3 मार्च को स्नान-दान पूर्णिमा रहेगी और काशी सहित कुछ स्थानों पर होली मनाई जाएगी। वहीं, 4 मार्च को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा होने के कारण देशभर में रंगों की होली खेली जाएगी। इस दिन पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र और धृति योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिसे धैर्य, दृढ़ता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
बांग्ला समाज 3 मार्च को खेलेगा अबीर
बांग्ला समाज के पंडित चंचल मुखर्जी ने बताया कि उनके पंचांग के अनुसार पूर्णिमा का प्रवेश 2 मार्च शाम 5:44 बजे होगा और समाप्ति 3 मार्च शाम 4:59 बजे होगी। इसी कारण बांग्ला समाज 3 मार्च को दोल पूर्णिमा (अबीर खेला) मनाएगा। परंपरा के अनुसार होलिका दहन के बाद पूर्णिमा के दिन अबीर खेला जाता है।
मिथिला पंचांग का मत
मिथिला पंचांग के अनुसार पंडित राजेंद्र पांडेय ने बताया कि 2 मार्च को सुबह 5:31 बजे होलिका दहन होगा। इस दिन पातरिदान किया जाता है और मां भगवती की विशेष पूजा होती है। मिथिला क्षेत्र में भी होली 4 मार्च को ही खेली जाएगी।
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन से पूर्व पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। होलिका पर रोली, हल्दी और गुलाल से टीका लगाया जाता है। इसके बाद जल, कच्चा सूत, बताशे, चावल, फूल और नारियल अर्पित किए जाते हैं। अंत में होलिका की सात बार परिक्रमा कर अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
फाल्गुन माह के प्रमुख पर्व
फाल्गुन मास को पर्वों का महीना माना जाता है। इस दौरान—
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13 फरवरी: विजया एकादशी
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15 फरवरी: महाशिवरात्रि
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27 फरवरी: आमलकी एकादशी व रंगभरी एकादशी
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28 फरवरी: गोविंद द्वादशी
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2 मार्च: होलिका दहन
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4 मार्च: होली

