खनिज राजस्व पर झारखंड के अधिकार से समझौता नहीं: कुणाल षाड़ंगी

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now झामुमो प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने खनिज अधिकारों पर केंद्र की नीति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अधिकारों पर समझौता हुआ तो आंदोलन को पंचायत स्तर तक ले जाएंगे। पूर्वी सिंहभूम: झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता

खनिज राजस्व पर झारखंड के अधिकार से समझौता नहीं: कुणाल षाड़ंगी
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  • झामुमो प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने खनिज अधिकारों पर केंद्र की नीति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अधिकारों पर समझौता हुआ तो आंदोलन को पंचायत स्तर तक ले जाएंगे।

पूर्वी सिंहभूम: झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने रविवार को बिष्टुपुर स्थित परिसदन में प्रेस वार्ता कर झारखंड के खनिज अधिकार और राजस्व को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को जिलों से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा।

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। लेकिन खनन के कारण विस्थापन, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का असर राज्य की जनता को झेलना पड़ता है।

खनिज राजस्व के अधिकार पर उठाए सवाल

कुणाल षाड़ंगी ने माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन संशोधन कानून 2026 को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से राज्यों की खनिज युक्त भूमि पर कर, उपकर और अन्य लेवी लगाने की शक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। उनके अनुसार, खनिज राजस्व से जुड़े राज्य के अधिकारों को सीमित करना झारखंड के साथ आर्थिक अन्याय होगा।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार इस बदलाव का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी केंद्र से कानून पर पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

कुणाल षाड़ंगी ने जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि खनिज युक्त भूमि को भूमि की श्रेणी में माना गया है।

उन्होंने बताया कि इसके बाद झारखंड विधानसभा ने मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून पारित किया। उन्होंने कहा कि राज्य के संवैधानिक अधिकारों और वित्तीय स्वायत्तता को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि खनिज वहन भूमि सेस से राज्य को मिलने वाला राजस्व झारखंड के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

हजारों करोड़ के राजस्व का अनुमान

उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2024-25 में करीब 1,379 करोड़ रुपये, 2025-26 में लगभग 7,488 करोड़ रुपये और 2026-27 में करीब 13,215 करोड़ रुपये राजस्व का अनुमान लगाया गया है।

उनके अनुसार, इस राशि का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और खनन प्रभावित लोगों के पुनर्वास में किया जा सकता है।

प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर जोर

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की जमीन से निकलती है, इसलिए उससे जुड़े आर्थिक फैसलों में राज्य के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि खनन के कारण विस्थापन, जल और वायु प्रदूषण, वन क्षेत्र पर दबाव तथा स्थानीय आधारभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है। ऐसे में खनिज राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च होना चाहिए।

अधिकारों पर समझौता हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

झामुमो नेता ने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों से देश को लाभ पहुंचता है, लेकिन राज्य के अधिकारों और जनता के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने झारखंड के खनिज और राजस्व अधिकारों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। इसे जिलों से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर तक ले जाने की बात उन्होंने कही।

कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार से राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने और खनिज उत्पादक राज्यों के वित्तीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि झारखंड अपने प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं है, लेकिन राज्य के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों की कीमत पर कोई व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी।

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