New Delhi : वैदिक ज्योतिष के अनुसार वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में पड़ेगा।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जब भी बड़ा ग्रहण लगता है, उसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, विशेष रूप से करियर, आर्थिक स्थिति और मानसिक जीवन पर।
चंद्र ग्रहण 2026 का समय और सूतक काल
3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा।
ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है, यानी इसका सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होगा। सूतक काल में धार्मिक कार्यों से परहेज किया जाता है और विशेष सावधानियां बरती जाती हैं।
क्या होता है चंद्र ग्रहण?
खगोल विज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह घटना हमेशा पूर्णिमा के दिन होती है।
ज्योतिष में:
- चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है।
- सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
सिंह राशि में लगने वाला यह ग्रहण जीवन में बदलाव, नई जिम्मेदारियां और पहचान मिलने के संकेत दे सकता है।
इन राशियों को मिल सकता है लाभ
मेष राशि वालों के लिए यह समय लाभकारी हो सकता है।
- करियर में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं।
- लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं।
- प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना।
- आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत।
इस दौरान आपकी नेतृत्व क्षमता मजबूत हो सकती है और अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। हालांकि निरंतर मेहनत जरूरी रहेगी।
धनु राशि के जातकों के लिए भी यह ग्रहण सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
- पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के योग।
- रुका हुआ धन वापस मिल सकता है।
- करियर में नई दिशा मिल सकती है।
- आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी, जिससे मानसिक संतुलन बेहतर रहेगा।
यात्रा के भी योग बन सकते हैं। निवेश से लाभ संभव है, लेकिन सोच-समझकर निर्णय लेना आवश्यक है। गुस्से पर नियंत्रण रखना फायदेमंद रहेगा।
ग्रहण का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। इसलिए व्यक्तिगत परामर्श के लिए ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

