Ranchi: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची की ओर से शनिवार को व्यवहार न्यायालय, रांची में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। सुबह 10:30 बजे शुरू हुई लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई और निस्तारण किया गया। इसके लिए कुल 10 बेंचों का गठन किया गया था। मासिक लोक अदालत के दौरान अलग-अलग प्रकृति के कुल 2812 वादों का निष्पादन किया गया। इन मामलों में समझौते के आधार पर कुल 1,08,12,598 रुपये की राशि प्राप्त हुई। लोक अदालत के माध्यम से मामलों के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
10 बेंचों पर हुई मामलों की सुनवाई
मासिक लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से कुल 10 बेंच बनाए गए थे। इन बेंचों पर संबंधित मामलों की सुनवाई और दोनों पक्षों के बीच समझौते के आधार पर निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की गई। लोक अदालत का उद्देश्य ऐसे मामलों का आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से समाधान करना है, जिससे पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सके।
2812 मामलों का हुआ निपटारा
शनिवार को आयोजित लोक अदालत में कुल 2812 वादों का निष्पादन किया गया। मामलों के निस्तारण के साथ अलग-अलग प्रकरणों में समझौता राशि भी प्राप्त हुई।
मुख्य आंकड़े:
- लोक अदालत में गठित बेंच: 10
- निष्पादित वाद: 2812
- प्राप्त समझौता राशि: ₹1,08,12,598
- आयोजन स्थल: व्यवहार न्यायालय, रांची
- शुरुआत: सुबह 10:30 बजे
लंबित मामलों के निस्तारण पर रहा जोर
लोक अदालत के आयोजन से पहले संबंधित न्यायालयों की ओर से वादकारियों को नोटिस भेजे जा रहे थे। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लंबित मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निपटाने के लिए पक्षकारों को अवसर उपलब्ध कराना था। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने आयोजन को सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और अन्य व्यवस्थाएं पहले से पूरी की थीं। नोटिस के जरिए पक्षकारों को लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों के समाधान की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जानकारी दी गई थी।
समझौते के जरिए मामलों के समाधान पर जोर
लोक अदालत में मामलों का निस्तारण पक्षकारों की सहमति और समझौते के आधार पर किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विवादों का सरल और त्वरित समाधान उपलब्ध कराना है। रांची व्यवहार न्यायालय में आयोजित मासिक लोक अदालत में भी बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण इसी प्रक्रिया के तहत किया गया। इससे लंबित मामलों की संख्या कम करने के साथ पक्षकारों को भी अपने विवाद के समाधान का अवसर मिला। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियों के जरिए लोगों को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने और लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।




