मुकेश रंजन
Ranchi : सरकारी प्रतिष्ठानों में तैनात निजी सुरक्षा गार्डों के कथित शोषण को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि संबंधित सुरक्षा एजेंसी ने सीआईपी, बीएयू और रिनपास में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी, ईपीएफ, बोनस सहित कई वैधानिक सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं दिया। इतना ही नहीं, लेबर कोर्ट के आदेश के बावजूद सीआईपी और बीएयू के गार्डों का एरियर भुगतान अब तक लंबित रहने का दावा किया जा रहा है।
कार्रवाई के बजाय फिर बहाली की अनुमति क्यों? :
सबसे बड़ा सवाल सरकारी व्यवस्था पर उठ रहा है कि जिन एजेंसियों पर श्रमिकों के अधिकारों के हनन के आरोप हैं, उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें राज्य के विभिन्न प्रखंडों में सुरक्षा गार्डों की बहाली की अनुमति कैसे दी जा रही है?
गार्ड कर्मियों का आरोप है कि एजेंसी से जुड़ने के बाद उन्हें कम मजदूरी में काम करने तथा बहाली के नाम पर आर्थिक दबाव झेलने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि निजी सुरक्षा कर्मियों के हितों की निगरानी सुनिश्चित करे और श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराए।
‘बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए’:
सुरक्षा कर्मियों से जुड़े लोगों का कहना है कि राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि अक्सर मजदूरों, गरीबों और मेहनतकशों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन निजी सुरक्षा कर्मियों की समस्याओं को लेकर ठोस आंदोलन या विधानसभा में प्रभावी आवाज कम ही सुनाई देती है।
समानता सिक्योरिटी एजेंसी, एसआईएस समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज की भी निष्पक्ष जांच और श्रम कानूनों के अनुपालन की मांग उठ रही है। हालांकि, किसी एजेंसी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकती है।
केंद्र के समान वेतन की मांग:
सुरक्षा कर्मियों से जुड़े लोगों की मांग है कि राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों एवं संस्थानों में कार्यरत निजी सुरक्षा गार्डों को भी केंद्र सरकार के संस्थानों में समान प्रकृति का कार्य करने वाले सुरक्षा कर्मियों के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी, ईपीएफ, बोनस, अवकाश और अन्य वैधानिक सुविधाएं मिलनी चाहिए।
उनका तर्क है कि जब राज्य सरकार के कर्मचारियों और अधिकारियों को सातवें वेतनमान का लाभ मिल रहा है, तो सरकारी संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले मेहनतकश निजी सुरक्षा कर्मियों के अधिकारों की अनदेखी क्यों की जाए?
बड़ा सवाल: मेहनतगारों के अधिकार कब होंगे सुरक्षित?
दिन-रात सरकारी संस्थानों की सुरक्षा में तैनात रहने वाले हजारों निजी सुरक्षा कर्मियों के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा? क्या श्रम कानूनों का उल्लंघन करने के आरोपों वाली एजेंसियों की जांच होगी, लंबित एरियर का भुगतान कराया जाएगा और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी? अब निगाहें सरकार, श्रम विभाग और संबंधित संस्थानों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।





