छह महीने से नहीं मिली मजदूरी: कैसे जिएंगे मनरेगा मजदूर?

Mukesh Ranjan Ranchi : झारखंड की राजधानी से सटे बुढ़मू प्रखंड में मनरेगा मजदूरों की हालत बदतर होती जा रही है। बीते छह महीनों से 12,000 से अधिक मजदूरों को उनकी मेहनत की मजदूरी नहीं मिली है। कई योजनाओं पर काम कर चुके ये मजदूर

छह महीने से मजदूरी नहीं… कैसे जिएंगे मनरेगा मजदूर?
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Mukesh Ranjan

Ranchi : झारखंड की राजधानी से सटे बुढ़मू प्रखंड में मनरेगा मजदूरों की हालत बदतर होती जा रही है। बीते छह महीनों से 12,000 से अधिक मजदूरों को उनकी मेहनत की मजदूरी नहीं मिली है। कई योजनाओं पर काम कर चुके ये मजदूर अब भूखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

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सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे बिरसा सिंचाई कूप, हरित आम बागवानी, अबुआ आवास, प्रधानमंत्री आवास और आंबेडकर आवास अधर में लटकी पड़ी हैं। काम तो पूरा कर लिया गया है, लेकिन भुगतान का इंतजार खत्म नहीं हो रहा।

योजनाओं की स्थिति:

  • बिरसा सिंचाई कूप: 341
  • हरित बागवानी (150 एकड़)
  • गाय शेड: 220
  • अबुआ आवास: 1109
  • पीएम आवास: 181
  • आंबेडकर आवास: 23

भुगतान में देरी का संकट:

  • मजदूरों की बकाया मजदूरी: ₹1.6 करोड़
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 का लंबित भुगतान: ₹60,000
  • वेंडरों का बकाया: ₹2.1 करोड़

स्थानीय मजदूरों की व्यथा:

“हमने खेत समतल किए, गड्ढे खोदे, मिट्टी ढोई, लेकिन आज तक मजदूरी नहीं मिली। चूल्हा ठंडा है, बच्चे भूखे हैं। क्या यही विकास है?” – एक स्थानीय मजदूर ने आंसुओं के साथ कहा।

सामग्री आपूर्तिकर्ता (वेंडर) भी नाराज:

वेंडरों ने भुगतान न मिलने के कारण सामग्री आपूर्ति पर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि जब तक बकाया नहीं मिलेगा, कोई सामग्री नहीं दी जाएगी।

बरसात की चुनौती:

बरसात सिर पर है। सिंचाई कूप अधूरे रहे तो किसान खेत की बुआई नहीं कर पाएंगे, जिससे फसल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

मनरेगा कर्मियों का भी बुरा हाल:

न सिर्फ मजदूर, बल्कि मनरेगा में काम कर रहे कर्मियों को भी छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फंड की कमी है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार कब नींद से जागेगी?

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