Ujjain : श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान श्री महाकालेश्वर की पहली भव्य सवारी आज नगर भ्रमण पर निकलेगी। भगवान महाकाल इस बार श्री मनमहेश स्वरूप में रजत पालकी में विराजित होकर नगरवासियों को दर्शन देंगे। इस मौके पर उज्जैन के श्रद्धालु वैदिक मंत्रोच्चार और भजन मंडलियों के साथ उनका स्वागत करेंगे।
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प्रातः मंदिर सभामंडप में भगवान का विधिवत पूजन-अर्चन होगा। इसके पश्चात अपराह्न 4 बजे सवारी मंदिर के मुख्य द्वार से निकलेगी, जहां सशस्त्र पुलिस बल भगवान को सलामी देगा। सवारी परंपरागत मार्ग—महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वहाँ माँ क्षिप्रा के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी अन्य मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर लौटेगी।
इस सवारी की विशेष बात यह है कि इसमें मध्यप्रदेश जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा चयनित जनजातीय कलाकार भी भाग लेंगे। सीधी से घसियाबाजा, सिवनी से गुन्नूरसाई, अनूपपुर से ढांढल नृत्य और सागर से सैरा लोक नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। यह दल भगवान महाकाल की पालकी के आगे भक्ति प्रदर्शन करते चलेंगे।
इस मौके पर 500 से अधिक वैदिक बटुक वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए मां क्षिप्रा के दोनों तटों—दत्त अखाड़ा व रामघाट क्षेत्र—में पूजा करेंगे। इन वैदिक उद्घोषों से वातावरण पूरी तरह धार्मिक और शुभ हो जाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए सवारी मार्ग में चलित एलईडी रथ की व्यवस्था की गई है, जिससे लाइव दर्शन प्राप्त होंगे। मंदिर समिति ने सभी नागरिकों से अपील की है कि सवारी मार्ग में सुरक्षा व व्यवस्था का ध्यान रखें। कोई भी श्रद्धालु सवारी के बीच में न जाए, फल-प्रसाद न फेंके, और अनावश्यक भीड़ न बढ़ाएं।
महाकालेश्वर मंदिर समिति हर सवारी को विशेष रूप देने के लिए थीम आधारित आयोजन कर रही है। इस पहली सवारी में वैदिक उद्घोष और मनमहेश स्वरूप इसकी विशेषता रहेगी। यह आयोजन उज्जैनवासियों के लिए अत्यंत पुण्यदायी और गौरवपूर्ण अवसर है।



