- चौथे स्थापना दिवस पर स्वास्थ्य, शिक्षा और समाजसेवा के संकल्प को मिली नई उड़ान, ‘आरोग्यम’ पहल से बुजुर्गों तक पहुंचेगी घर-घर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा
मुकेश रंजन
Ranchi : समाजसेवा को समर्पित राथिका और एतवारी मेमोरियल ट्रस्ट ने अपने चौथे स्थापना दिवस को जनसेवा के महापर्व के रूप में मनाते हुए मानवता और सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश की। कांके जनरल हॉस्पिटल परिसर में आयोजित भव्य समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम का शुभारंभ ट्रस्ट के संस्थापक सह अध्यक्ष डॉ. शंभु प्रसाद सिंह ने केक काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने ट्रस्ट की चार वर्षों की सेवा यात्रा, उद्देश्य और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए समाजहित के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष डॉ. कुमारी आशा ने ‘आरोग्यम’ पहल की जानकारी देते हुए समाज के लोगों से बुजुर्गों की सेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और हर व्यक्ति को समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
डॉ. शंभु प्रसाद सिंह ने बताया कि ट्रस्ट की स्थापना का उद्देश्य निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करना है। पिछले चार वर्षों में ट्रस्ट ने मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, जरूरतमंद परिवारों के बीच कंबल एवं भोजन वितरण, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण, गरीब बच्चों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना तथा निःशुल्क चिकित्सा शिविरों के माध्यम से परामर्श, स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण जैसे अनेक जनहितकारी कार्य सफलतापूर्वक किए हैं।
उन्होंने बताया कि आगामी अगस्त माह से ट्रस्ट की महत्वाकांक्षी ‘आरोग्यम’ योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की टीम अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी मरीजों और बुजुर्गों को उनके घर पर गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। इस सेवा के लिए आवश्यक भवन का निर्माण अंतिम चरण में है और शीघ्र ही इसका शुभारंभ किया जाएगा।
समारोह में डॉ. कुमारी आशा, सत्येंद्र कुमार, त्रिनयन कुमार, डॉ. एम.पी. सिन्हा, मीनू मीना सिन्हा, डॉ. वी.के. राय, महेश सिंह, डॉ. नरेश प्रसाद सिंह, डॉ. अनुप कांत, डॉ. प्रयाग राज सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसने उपस्थित लोगों को समाजहित में आगे बढ़कर योगदान देने के लिए प्रेरित किया।



