बिहार में नई सहकारी चीनी मिलों की तैयारी तेज, मंत्री ने की समीक्षा

बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की तैयारी चल रही है। पटना : बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में

बिहार में नई सहकारी चीनी मिलों की तैयारी तेज, मंत्री ने की समीक्षा
  • बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की तैयारी चल रही है।

पटना : बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की तैयारी चल रही है। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने मंगलवार को दोनों परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की और सभी कार्य तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

यह पहल सात निश्चय-3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ के लक्ष्य के तहत की जा रही है। बैठक में रैयाम और सकरी चीनी मिलों की स्थापना, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), वित्तीय प्रावधान, किसान सदस्यता अभियान, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के साथ प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MOU) और परियोजना के अगले चरणों की समीक्षा की गई।

बंद चीनी मिलों की जमीन पर नई मिलों की तैयारी

राज्य मंत्रिपरिषद ने दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में बंद चीनी मिलों की भूमि पर नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने का निर्णय लिया है। दोनों परियोजनाओं के लिए संभाव्यता प्रतिवेदन और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कराने की स्वीकृति मिल चुकी है।

नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से कार्रवाई चल रही है। इसके साथ ही प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन को भी मंजूरी दी जा चुकी है।

प्रस्तावित दोनों मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इन्हें एकीकृत कृषि-आधारित औद्योगिक मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है।

MOU और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया की समीक्षा

समीक्षा बैठक में IPL के साथ प्रस्तावित MOU की प्रगति पर भी चर्चा हुई। MOU का प्रारूप तैयार कर विभागीय मंत्री की मंजूरी ली जा चुकी है। अनुमोदित प्रारूप IPL को सहमति के लिए भेज दिया गया है।

रैयाम और सकरी चीनी मिलों की भूमि को प्रस्तावित रूप से IPL को 30 वर्षों की लीज पर हस्तांतरित करने से जुड़ी प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।

दोनों परियोजनाओं की लागत ₹852.43 करोड़

रैयाम और सकरी की नई सहकारी चीनी मिल परियोजनाओं की प्रस्तावित कुल लागत करीब ₹852.43 करोड़ है। इसमें रैयाम परियोजना की अनुमानित लागत ₹504.67 करोड़ और सकरी परियोजना की अनुमानित लागत ₹347.76 करोड़ है।

परियोजनाओं से औद्योगिक गतिविधियों के साथ गन्ना उत्पादन, कृषि सेवाओं, परिवहन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद से जुड़ी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं।

27,980 किसानों ने सदस्यता के लिए किया आवेदन

मंत्री ने कहा कि दोनों चीनी मिल परियोजनाओं की सफलता में किसानों की सक्रिय भागीदारी अहम है। इसी उद्देश्य से रैयाम और सकरी के कमांड एरिया में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

रैयाम कमांड एरिया से 12,264 और सकरी कमांड एरिया से 15,716 ऑनलाइन आवेदन मिले हैं। दोनों क्षेत्रों से कुल 27,980 किसानों ने सहकारी समितियों की सदस्यता के लिए आवेदन किया है। फिलहाल आवेदनों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

किसानों को गन्ना उत्पादन से लेकर ऋण तक सहयोग

प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियां किसानों को संबंधित चीनी मिलों में गन्ना आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध कराने में भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा किसानों को उन्नत गन्ना बीज, कृषि आदान, तकनीकी सहायता, मिट्टी जांच, प्रशिक्षण और जागरूकता जैसी सेवाएं भी दी जाएंगी।

गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए गांव-वार गन्ना क्षेत्र का आकलन और क्षेत्र विस्तार की योजना पर भी काम किया जाएगा। किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकों के साथ समन्वय किया जाएगा।

कृषि यंत्रीकरण और Custom Hiring Centre के माध्यम से किसानों को कृषि मशीनरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

बैठक में धर्मेंद्र सिंह, सचिव, सहकारिता विभाग, रजनीश कुमार सिंह, निबंधक, सहयोग समितियाँ और विकास कुमार बारियार, अपर निबंधक (न्यायिक), सहयोग समितियाँ सहित संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे।

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