जामताड़ा: स्वास्थ्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र जामताड़ा का सदर अस्पताल एक बार फिर विवादों में है। अस्पताल में एक ही रात में तीन मरीजों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से इनकार किया है।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात इलाज के लिए पहुंचे दो मरीजों की सदर अस्पताल में मौत हो गई। वहीं, सांप काटने से पीड़ित एक युवती को धनबाद रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
मृतकों की पहचान 25 वर्षीय मुन्ना मोहाली (चापड़िया), 45 वर्षीय बाबूलाल मरांडी (चंद्रदीपा) और 25 वर्षीय पार्वती दास (मंडलों) के रूप में हुई है।
परिजनों का आरोप है कि मरीज पूरी रात दर्द से तड़पते रहे, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर वार्ड तक नहीं पहुंचे। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिलता, तो शायद तीनों की जान बचाई जा सकती थी।
हालांकि, आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉ. ए.पी.एन. देव ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मुन्ना मोहाली और बाबूलाल मरांडी की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहद गंभीर थी, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। वहीं, पार्वती दास के मामले में उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही।
घटना के बाद भाजपा नेत्री बबीता झा ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जामताड़ा सदर अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
गौरतलब है कि हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को अस्पतालों की व्यवस्था में 15 दिनों के भीतर सुधार करने का निर्देश दिया था। ऐसे में उनके ही विधानसभा क्षेत्र के सदर अस्पताल में सामने आई यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
फिलहाल मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से विस्तृत जांच की संभावना जताई जा रही है।



