Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विवाह और रिश्तों को लेकर बनी पारंपरिक धारणाओं पर चर्चा छेड़ दी है। जिस उम्र में अधिकांश लोग परिवार और पोते-पोतियों के साथ जीवन बिताते हैं, उसी उम्र में एक बुजुर्ग दंपति ने अदालत के माध्यम से अपने वैवाहिक संबंध को समाप्त कर दिया।
कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले अर्जुन (60 वर्ष से अधिक) और उनकी पत्नी सोना ने आपसी सहमति से तलाक लेकर कई दशक पुराने वैवाहिक रिश्ते का अंत कर दिया। दोनों के बेटे-बेटियां और नाती-पोते हैं, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के कारण उन्होंने अलग होने का फैसला किया।
दोनों ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए जामताड़ा व्यवहार न्यायालय के फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार ने दोनों पक्षों को समझाने और मध्यस्थता (मेडिएशन) के माध्यम से रिश्ता बचाने का प्रयास किया। हालांकि, जब सभी प्रयास असफल रहे तो अदालत ने सोमवार को दोनों के वैवाहिक संबंध विच्छेद की अनुमति दे दी।
अदालत के फैसले के बाद दोनों शांतिपूर्वक अलग-अलग रास्तों पर चले गए। न कोई विवाद हुआ और न ही कोई सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप।
पति अर्जुन का कहना है कि उनकी पत्नी कई वर्षों से अपने मायके में रह रही थीं और उनके साथ रहने को तैयार नहीं थीं। वहीं, पत्नी सोना का आरोप है कि उनके पति हमेशा विवाद करते थे और कोई काम नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने मायके में रहना ही उचित समझा।
दंपति के अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि दोनों ने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने और समझौते के प्रयास विफल रहने के बाद विवाह विच्छेद की अनुमति प्रदान कर दी।
यह मामला केवल एक तलाक की घटना नहीं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लंबे वैवाहिक जीवन के बाद भी यदि मतभेद दूर नहीं हो पाते, तो कुछ दंपति आपसी सहमति से अलग होकर अपनी-अपनी तरह से जीवन जीने का निर्णय लेते हैं।



