भीषण बारिश में भी नहीं बुझी सरना परंपरा की लौ, जनजातीय परिवारों की वापसी

Ranchi : जिले के सिसई प्रखंड के कुदरा गांव में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। भीषण बारिश के बीच गांव के देवी मंडप में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पांच जनजातीय परिवारों ने ईसाई धर्म त्यागकर फिर से सरना आस्था में वापसी की।

भीषण बारिश में भी नहीं बुझी सरना परंपरा की लौ, जनजातीय परिवारों की वापसी
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Ranchi : जिले के सिसई प्रखंड के कुदरा गांव में शुक्रवार  को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। भीषण बारिश के बीच गांव के देवी मंडप में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पांच जनजातीय परिवारों ने ईसाई धर्म त्यागकर फिर से सरना आस्था में वापसी की। इस ‘घर वापसी’ कार्यक्रम में गांव के पहान-पुजारी ने मंत्रोच्चार, अर्घ्य और पूजा विधियों से इन परिवारों का विधिवत पुनर्संस्कार किया।

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जहां एक ओर बिजली की गड़गड़ाहट और मूसलधार बारिश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर ‘जय सरना’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। देवी मंडप को पारंपरिक झंडों, फूलों की मालाओं, रंगोली और दीपों से सजाया गया था। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच, गौ सेवा समाज समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीण महिला-पुरुष भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे।

गौरतलब है कि इन परिवारों ने कुछ समय पहले चंगाई सभा और अंधविश्वास के प्रभाव में आकर धर्म परिवर्तन कर लिया था। इससे गांव में सामाजिक ताना-बाना बिगड़ गया था और सांस्कृतिक असंतुलन महसूस किया गया। लेकिन बीते एक सप्ताह में गांव में लगातार पंचायतें, सामाजिक संवाद और जागरूकता अभियान चले, जिसके बाद ये परिवार आत्मचिंतन करते हुए अपनी मूल आस्था की ओर लौटे।

एक भावुक परिवार ने वापसी के बाद कहा – “हमने जो खोया था, आज उसे फिर पा लिया। परंपरा ही हमारा जीवन है, यही हमारी पहचान है।”

सूत्रों के मुताबिक, धर्मांतरण से प्रभावित अन्य क्षेत्रों में भी हिंदू संगठनों द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों को न केवल सामाजिक सहयोग बल्कि पुनर्वास और आर्थिक मदद भी दी जा रही है, ताकि वे सम्मानपूर्वक समाज में दोबारा स्थापित हो सकें।

यह घटना सिर्फ धर्म की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और जनजातीय अस्मिता के पुनर्प्रतिष्ठान का प्रतीक बन गई है।

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