झारखंड में कुपोषण की गंभीर तस्वीर: 22% बच्चों का शरीर ऊर्जा के लिए अपनी मांसपेशियां खा रहा

Ranchi : झारखंड में कुपोषण की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। राज्य सरकार द्वारा सदन में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में करीब 22% बच्चे ‘वेस्टिंग’ (Wasting) की स्थिति में हैं। यह कुपोषण का सबसे गंभीर स्तर माना जाता है, जिसमें शरीर

झारखंड में कुपोषण की गंभीर तस्वीर: 22% बच्चों का शरीर ऊर्जा के लिए अपनी मांसपेशियां खा रहा
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Ranchi : झारखंड में कुपोषण की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। राज्य सरकार द्वारा सदन में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में करीब 22% बच्चे ‘वेस्टिंग’ (Wasting) की स्थिति में हैं। यह कुपोषण का सबसे गंभीर स्तर माना जाता है, जिसमें शरीर ऊर्जा के लिए पहले वसा (Fat) और बाद में अपनी ही मांसपेशियों के प्रोटीन को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करता है

कुपोषण का मुख्य कारण गरीबी

विशेषज्ञों के अनुसार कुपोषण का प्रमुख कारण गरीबी और पोषक आहार की कमी है। पर्याप्त भोजन और पोषण नहीं मिलने से बच्चों में पहले एनीमिया होता है, फिर उनका वजन कम होने लगता है। इसके बाद उनकी लंबाई उम्र के अनुसार नहीं बढ़ती और वे ठिंगनापन (Stunting) के शिकार हो जाते हैं।

जब स्थिति और गंभीर हो जाती है, तो बच्चे वेस्टिंग की अवस्था में पहुंच जाते हैं, जहां शरीर अत्यधिक कमजोर और कंकाल जैसा दिखने लगता है।

राष्ट्रीय औसत से खराब स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में झारखंड की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी खराब है:

  • एनीमिया:

    • भारत का औसत: 67.1%

    • झारखंड: 67.5%

  • ठिंगनापन (Stunting):

    • भारत का औसत: 35.5%

    • झारखंड: 39.6%

  • वेस्टिंग (Wasting):

    • भारत का औसत: 19.3%

    • झारखंड: 22%

राजधानी रांची में ही ऐसे बच्चों की संख्या 30–40% के बीच बताई गई है।

कई जिलों में स्थिति बेहद गंभीर

राज्य के कई जिलों में कुपोषण का असर अलग-अलग स्तर पर दिख रहा है।

30–40% बच्चे वेस्टिंग की स्थिति में:

  • रांची

  • खूंटी

  • पश्चिमी सिंहभूम

20–30% बच्चे वेस्टिंग की स्थिति में:

  • गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, रामगढ़, गिरिडीह

  • पूर्वी सिंहभूम, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा

10–20% बच्चे वेस्टिंग की स्थिति में:

  • कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद

  • चतरा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, देवघर

  • साहिबगंज, सरायकेला

ठिंगनापन की सबसे खराब स्थिति पश्चिमी सिंहभूम में

पश्चिमी सिंहभूम ऐसा जिला है जहां 60–70% बच्चे ठिंगनापन (Stunting) के शिकार हैं। वहीं पाकुड़ में भी 50–60% बच्चों में यह समस्या देखी गई है।

कुपोषण से निपटने के लिए चल रही 9 योजनाएं

राज्य में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • आंगनबाड़ी सेवा

  • पोषण अभियान

  • सक्षम आंगनबाड़ी पोषण 2.0

  • प्रधानमंत्री पोषण योजना

  • एनीमिया मुक्त भारत

  • प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना

  • नेशनल डिवॉर्मिंग प्रोग्राम

  • विटामिन-ए सप्लिमेंट प्रोग्राम

  • जननी सुरक्षा योजना

योजनाओं के बावजूद चिंता

इतनी योजनाओं के बावजूद झारखंड में बच्चों में कुपोषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या इन योजनाओं का लाभ वास्तव में जमीनी स्तर पर बच्चों तक पहुंच रहा है या नहीं।

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