पंचायत मतदाता सूची से स्मृति ईरानी का नाम गायब, चुनावी तैयारियों पर उठे सवाल

अमेठी: उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर विवाद शुरू हो गया है। Smriti Irani का नाम गौरीगंज ब्लॉक की मेदन मवई ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में शामिल न होने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच

पंचायत मतदाता सूची से स्मृति ईरानी का नाम गायब, चुनावी तैयारियों पर उठे सवाल
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अमेठी: उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर विवाद शुरू हो गया है। Smriti Irani का नाम गौरीगंज ब्लॉक की मेदन मवई ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में शामिल न होने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

इसके अलावा कई मृतकों के नाम सूची में बने रहने और शाहगढ़ ब्लॉक की पनियार ग्राम पंचायत में 870 से अधिक मतदाताओं के नाम गायब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे चुनावी तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

समय पर दस्तावेज देने के बावजूद नाम नहीं जुड़ने का आरोप

मेदन मवई ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि तीरथराज मिश्र ने आरोप लगाया कि स्मृति ईरानी का नाम पंचायत मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर बीएलओ को उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके बावजूद उनका नाम अंतिम सूची में नहीं जोड़ा गया।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत के कई मृतकों के नाम अभी भी मतदाता सूची में दर्ज हैं, जबकि उनके नाम हटाने के लिए संबंधित दस्तावेज पहले ही प्रशासन को सौंपे जा चुके हैं।

870 से अधिक मतदाताओं के नाम गायब

वहीं, शाहगढ़ ब्लॉक की पनियार ग्राम पंचायत में 870 से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने की शिकायत सामने आई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और वे तत्काल संशोधन की मांग कर रहे हैं।

भाजपा ने उठाया मामला

Sudhanshu Shukla ने बताया कि स्मृति ईरानी का नाम विधानसभा मतदाता सूची में दर्ज है और पंचायत मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए गए थे।

उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत Preeti Tiwari से की गई है।

प्रशासन ने दी सफाई

एसडीएम गौरीगंज प्रीति तिवारी ने बताया कि पंचायत मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए जमा किए गए दस्तावेजों पर स्मृति ईरानी के हस्ताक्षर नहीं थे, इसलिए आवेदन स्वीकृत नहीं किया जा सका।

उन्होंने कहा कि हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने पर अनुपूरक मतदाता सूची के माध्यम से उनका नाम जोड़ा जा सकता है। साथ ही मृतकों के नाम और अन्य शिकायतों की भी जांच कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

इस पूरे मामले ने पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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