Ranchi : सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, रांची में आयोजित छह दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग सह कार्यशाला का समापन सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ शैक्षिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सुदृढ़ स्थापना था। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। वैचारिक सत्र में श्री ओंकारनाथ सिन्हा ने “हिंदी भाषा का महत्त्व” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हिंदी हमारी मां के समान है, और हमें इसे मां के समान ही सम्मान देना चाहिए।” उन्होंने मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा के लाभों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के उदाहरण प्रस्तुत किए।
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समापन सत्र में शिशु विकास मंदिर समिति के अध्यक्ष अखिलेश्वर नाथ मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। विद्यालय की उपप्राचार्या मीना कुमारी ने अतिथियों का परिचय कराया। प्राचार्य ललन कुमार ने बताया कि इस प्रशिक्षण में वैचारिक सत्रों के साथ-साथ आदर्श कक्षा, योग-प्राणायाम, चर्चा सत्र और खेल जैसे कार्यक्रम शामिल किए गए जिससे आचार्यों के बहुआयामी विकास को बढ़ावा मिला।
नवीन नियुक्त आचार्या रौशनी कुमारी ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा और उन्हें आत्मनिरीक्षण के साथ सुधार का अवसर मिला। आचार्य प्रदीप चौधरी ने संस्कृत वंदना, श्लोक और मंत्रोच्चार से प्रभावित होकर अपने अनुभव साझा किए। वहीं प्राथमिक खंड की आचार्या श्रीमती स्वाति महापात्रा ने एकल गीत “भारत माता तेरा आंचल हरा भरा” की सजीव प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गया। शिशु विकास मंदिर समिति के मंत्री अखिलेश्वर नाथ मिश्र ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से आचार्यों में सामूहिकता और सहयोग की भावना विकसित होती है। उन्होंने सभी आचार्यों से अपने दायित्वों के प्रति पूर्ण निष्ठा और समर्पण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सह मंत्री डॉ. धनेश्वर महतो ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर एस. वेंकट रमन, आशीष नाथ शाहदेव, लाल अशोक नाथ शाहदेव, विनोद कुमार, योगेश्वर दुबे सहित विद्यालय परिवार के सभी आचार्य एवं दीदीजी उपस्थित थे।


