बंगाल में SIR को लेकर बढ़ा तनाव, विशेष रोल पर्यवेक्षकों ने मांगी केंद्रीय सुरक्षा

Kolkata : पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान तैनात विशेष रोल पर्यवेक्षकों ने फील्ड ड्यूटी में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्यवेक्षकों ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि उन्हें केंद्रीय सशस्त्र

बंगाल में SIR को लेकर बढ़ा तनाव, विशेष रोल पर्यवेक्षकों ने मांगी केंद्रीय सुरक्षा
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Kolkata : पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान तैनात विशेष रोल पर्यवेक्षकों ने फील्ड ड्यूटी में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्यवेक्षकों ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से अपना कार्य कर सकें।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सीईओ कार्यालय की ओर से नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि मौजूदा हालात में केवल राज्य पुलिस की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है।

पर्यवेक्षकों ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि केंद्रीय बल उपलब्ध कराना संभव न हो, तो उन्हें मजिस्ट्रेटी अधिकार दिए जाएं। इससे उनके साथ तैनात सुरक्षा बल उनके निर्देशों का पालन कर सकेगा और राज्य पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी जा सकेगी।

यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब गुरुवार को दक्षिण 24 परगना जिले के फलता इलाके में एसआईआर निगरानी के दौरान विशेष रोल पर्यवेक्षक सी. मुरुगन को विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस की महिला समर्थकों ने विरोध जताया था, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।

इसके अलावा, विशेष रोल पर्यवेक्षकों ने नदिया जिले के कृष्णनगर में आयोजित एसआईआर विरोधी रैली के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान की समीक्षा करने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री के बयान से महिला मतदाताओं को मतदाता सूची संशोधन से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ उकसाया गया।

कृष्णनगर रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि यदि मतदाता सूची से नाम हटाए जाते हैं तो महिलाएं रसोई के बर्तन लेकर विरोध के लिए तैयार रहें। इस बयान के बाद चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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