Ranchi : सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, रांची में आयोजित छह दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग सह कार्यशाला के पाँचवें दिन का आयोजन सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत रूप से दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन और सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिससे सत्र का शुभारंभ सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुआ। प्रशिक्षण सत्र के दौरान “सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा” विषय पर एक विचारात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने बताया कि यह शिक्षा प्रणाली छात्रों को अपने भावों की समझ, प्रबंधन एवं सामाजिक संपर्क कौशल विकसित करने में सहायक होती है। यह पहल विद्यालयीन शिक्षा के भीतर एक समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इसके पश्चात ‘पाठ योजना निर्माण एवं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन’ विषय पर एक उपयोगी चर्चा सत्र आयोजित हुआ। इस सत्र में शिक्षकों ने पाठ योजना की संरचना, प्रभावी शिक्षण विधियाँ, विषय आधारित गतिविधियाँ, समय प्रबंधन तथा मूल्यांकन पद्धतियों पर अपने विचार साझा किए। चर्चा का संचालन कर रहे प्रवक्ता ने विषय की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए इसे व्यावहारिक अनुभवों से जोड़कर सत्र को सारगर्भित दिशा प्रदान की। कार्यक्रम के अंतिम चरण में शारीरिक गतिविधियों के अंतर्गत खेल, योग, प्राणायाम और विभिन्न आसानों का अभ्यास कराया गया, जिससे प्रतिभागियों में ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ।

इस अवसर पर शिशु विकास मंदिर समिति, झारखंड रांची के सह मंत्री डॉ. धनेश्वर महतो, बलराम उपाध्याय, विद्यालय के प्राचार्य ललन कुमार, उपप्राचार्य मीना कुमारी सहित सभी आचार्य एवं दीदीजी की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। इस प्रशिक्षण वर्ग ने न केवल शिक्षकों के शैक्षणिक कौशल को समृद्ध किया, बल्कि उनमें एक नई ऊर्जा और शिक्षण के प्रति नवदृष्टिकोण का संचार भी किया।

