New Delhi : संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के जोरदार हंगामे के चलते बाधित हो गई। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध जताना शुरू कर दिया, जिसके बाद स्पीकर को कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
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विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बतौर नेता प्रतिपक्ष सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा, “अगर रक्षा मंत्री और सरकार के सांसदों को बोलने का पूरा मौका दिया जाता है, तो विपक्ष के नेताओं को भी अपनी बात रखने का हक मिलना चाहिए। लेकिन मुझे बोलने ही नहीं दिया जाता।”
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब तक सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधूरी ही रहेगी। उन्होंने यह मुद्दा न सिर्फ अपने लिए बल्कि समूचे विपक्ष के लिए उठाया और कहा कि अगर सदन में सिर्फ एकतरफा संवाद होगा, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
इस मामले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार है, तो विपक्ष के नेता को सदन में बोलने का अधिकार मिलना चाहिए।
विपक्ष की ओर से मणिपुर की संवेदनशील स्थिति, हरियाणा में किसानों पर हुई पुलिस कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं को लेकर चर्चा की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि ये सभी देशहित से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं और इन पर संसद में खुलकर बहस होनी चाहिए।
सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, लेकिन संसदीय कार्यमंत्री ने पहले कहा था कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, बशर्ते वह नियम और परंपराओं के तहत हो।



