Ranchi: राजधानी का ऐतिहासिक पर्यटन स्थल टैगोर हिल, जिस पर लाखों रुपये खर्च कर सौंदर्यीकरण और विकास का दावा किया गया था, आज भी जमीनी हकीकत में बदहाली का प्रतीक बना हुआ है। सीढ़ियों पर जमी मिट्टी, सूखे पत्ते और जगह-जगह फैला कचरा साफ इशारा करता है कि रखरखाव महज कागजों तक सीमित रह गया है।
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स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि टैगोर हिल पर आने से अब मन को सुकून कम और नाराज़गी ज़्यादा होती है। टूटी-फूटी सीढ़ियाँ, गंदगी और अव्यवस्था इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को चोट पहुँचा रही हैं।
राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से पहले टैगोर हिल के विकास पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन न नियमित सफाई हो रही है, न कोई देखरेख का सिस्टम। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है—क्या टैगोर हिल केवल बजट खर्च करने का माध्यम बनकर रह गया है?


