अतिक्रमण हटाने में भेदभाव न हो: जलस्रोतों पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में डैम, तालाब और अन्य जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में किसी भी तरह के भेदभाव पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में डैम, तालाब और अन्य जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में किसी भी तरह के भेदभाव पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जलाशयों पर अवैध कब्जा करने वाले सभी लोगों को चिन्हित कर समान रूप से हटाया जाना चाहिए।

अदालत ने विशेष रूप से हरमू नदी की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए निर्देश दिया कि नदी को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई पांच जनवरी को तय की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से बड़ा तालाब की सफाई को लेकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा। सरकार की ओर से बताया गया कि रुड़की स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (IIH) से विशेषज्ञों की रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें तालाब के तल में जमी गाद और गंदगी को वैज्ञानिक तरीके से हटाने की योजना तैयार की जा रही है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

प्रार्थी पक्ष ने अदालत को बताया कि हरमू नदी में भारी मात्रा में कचरा जमा होने से नदी की धारा लगभग अवरुद्ध हो चुकी है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार और रांची नगर निगम को निर्देश दिया कि नदी में प्लास्टिक या ठोस कचरा न डाला जाए और सफाई की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।

हाईकोर्ट ने जलस्रोतों के संरक्षण और निगरानी के लिए झालसा के सदस्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति को नियमित निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दोहराया।

इसी क्रम में रांची नगर निगम ने खादगढ़ा और मधुकम इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया, जहां दो घंटे में 50 से अधिक अस्थायी संरचनाओं को ध्वस्त किया गया।

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