भागलपुर। शहर के दक्षिणी हिस्से में निर्माणाधीन भोलानाथ ओवरब्रिज (फ्लाइओवर) के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। मुख्य मार्ग बंद होने से वाहनों का दबाव भीखनपुर 12 नंबर गुमटी रेलवे फाटक पर कई गुना बढ़ गया है, जिसके चलते सुबह से देर रात तक घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। इससे स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और आम राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मालगाड़ियों के कारण लंबे समय तक बंद रहता है फाटक
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रेलखंड पर डबल रेलवे लाइन होने के कारण ट्रेनों का आवागमन लगातार बना रहता है। वहीं, सिग्नलिंग व्यवस्था में खामियों के चलते मालगाड़ियों को अक्सर रेलवे फाटक के पास ही रोक दिया जाता है। कई बार एक-एक मालगाड़ी आधे घंटे से एक घंटे तक खड़ी रहती है, जिससे रेलवे फाटक लंबे समय तक बंद रहता है और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
स्कूली बच्चे और एंबुलेंस भी जाम में फंस रहे
दोपहर के समय स्कूलों की बसें और वैन बच्चों को लेकर लौटती हैं, लेकिन उन्हें भीषण जाम में लंबे समय तक फंसे रहना पड़ता है। तपती धूप में घंटों इंतजार करना बच्चों और अभिभावकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
इसके अलावा मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस भी अक्सर इस जाम में फंस जाती हैं, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
वैकल्पिक मार्ग पर बढ़ा पूरा यातायात
भोलानाथ ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने के बाद मिरजानहाट, हबीबपुर, जगदीशपुर और गोराडीह सहित दक्षिणी भागलपुर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग बंद है। इसके विकल्प के रूप में पूरे क्षेत्र का यातायात भीखनपुर 12 नंबर गुमटी की ओर मोड़ दिया गया है।
संकरी सड़क और बार-बार बंद होने वाले रेलवे फाटक के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। फाटक खुलते ही दोनों ओर से वाहन एक साथ निकलने की कोशिश करते हैं, जिससे आमने-सामने वाहनों के फंसने से जाम और भी विकराल हो जाता है।
स्थानीय लोगों ने उठाई प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी व्यस्त रेलवे गुमटी होने के बावजूद यहां ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं है। लोगों ने मांग की है कि मालगाड़ियों को रेलवे आउटर पर रोका जाए, न कि रेलवे फाटक के पास। साथ ही फाटक के दोनों ओर पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक जवानों की तैनाती की जाए और भोलानाथ ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि वैकल्पिक मार्ग पर बढ़ा यातायात दबाव कम हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।



