New Delhi : टेक्नोलॉजी ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं इसके कुछ आधुनिक रूप अब समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। स्मार्ट ग्लासेस, जिन्हें हैंड्स-फ्री फोटो-वीडियो, ट्रांसलेशन और वॉयस असिस्टेंट जैसी सुविधाओं के लिए बनाया गया था, अब महिलाओं की निजता के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहे हैं।
होटल, पार्क, सड़क, बस स्टॉप और सुपरमार्केट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बिना जानकारी के महिलाओं की रिकॉर्डिंग किए जाने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कई देशों से आई रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि कुछ लोग स्मार्ट ग्लासेस का दुरुपयोग कर चोरी-छिपे वीडियो बना रहे हैं और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं।
‘पिक-अप आर्टिस्ट’ बनकर हो रहा दुरुपयोग
विशेषज्ञों के अनुसार, खुद को ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ कहने वाले कुछ लोग बातचीत के बहाने महिलाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं और पूरी बातचीत को स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड कर लेते हैं। बाद में इन वीडियो को आपत्तिजनक कैप्शन और हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर डाल दिया जाता है, जिससे महिलाओं को मानसिक तनाव, शर्मिंदगी और ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
विदेशों में सामने आए मामले
हाल ही में इंग्लैंड में एक महिला ने 47 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज कराया। महिला का आरोप था कि होटल में बिताए गए निजी पलों की रिकॉर्डिंग स्मार्ट ग्लासेस से की गई और बाद में वीडियो उसे भेजे गए। बिना अनुमति रिकॉर्डिंग के बावजूद आरोपी को जेल नहीं हुई, जिससे कानून की सीमाएं उजागर हो गईं।
अमेरिका में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां सुपरमार्केट में बातचीत के दौरान महिला को गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड किया गया और वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि पब्लिक प्लेस में प्राइवेसी को लेकर कानून तकनीक से पीछे चल रहा है। मोबाइल फोन का कैमरा दिख जाता है, जिससे सामने वाला सतर्क हो सकता है, लेकिन स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा छिपा होता है। ऐसे में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कोई व्यक्ति रिकॉर्ड कर रहा है या नहीं।
भारत में भी स्मार्ट ग्लासेस जैसी तकनीक के दुरुपयोग को लेकर स्पष्ट और सख्त कानूनों की कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब सार्वजनिक स्थानों पर रिकॉर्डिंग को लेकर स्पष्ट नियम, बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर कड़ी सजा, टेक कंपनियों की जवाबदेही और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए।
खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए कानून और तकनीक—दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है।



